आठवें वेतन आयोग पर बड़ी मांग, कर्मचारी यूनियनों ने कहा- 3 के बजाय 5 सदस्यों के आधार पर तय हो सैलरी

कर्मचारी यूनियनों ने आठवें वेतन आयोग में बड़ा बदलाव करने की मांग की है। उनका कहना है कि सैलरी कैलकुलेशन में परिवार इकाई को 3 से बढ़ाकर 5 किया जाए, जिससे कर्मचारियों की वास्तविक जिम्मेदारियों को शामिल किया जा सके। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन में बड़ा इजाफा हो सकता है।

आठवें वेतन आयोग पर बड़ी मांग, कर्मचारी यूनियनों ने कहा- 3 के बजाय 5 सदस्यों के आधार पर तय हो सैलरी

दि राइजिंग न्यूज | 12 मई 2026

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित आठवें वेतन आयोग को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आ गया है। कर्मचारी यूनियनों ने मांग की है कि वेतन तय करने के पुराने फॉर्मूले में बदलाव किया जाए और परिवार इकाई को तीन से बढ़ाकर पांच किया जाए। इस मांग के बाद सरकारी कर्मचारियों की सैलरी संरचना में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। यूनियनों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था आज के समय की आर्थिक जरूरतों के हिसाब से उपयुक्त नहीं है, इसलिए इसमें तुरंत संशोधन किया जाना चाहिए।


अभी कैसे तय होती है सैलरी, क्या है पुराना फॉर्मूला

वर्तमान वेतन प्रणाली में सरकार एक निश्चित परिवार संरचना को आधार मानकर न्यूनतम वेतन तय करती है। इसमें माना जाता है कि एक कर्मचारी का परिवार केवल तीन इकाइयों पर आधारित है।

इसमें शामिल होते हैं— स्वयं कर्मचारी, जीवनसाथी और दो बच्चे। इसी आधार पर सरकार न्यूनतम वेतन और अन्य भत्तों की गणना करती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह मॉडल बहुत पुराना हो चुका है और आज के परिवार ढांचे को सही तरीके से नहीं दर्शाता।


कर्मचारी यूनियनों की क्या है मुख्य मांग

कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि परिवार इकाई को तीन से बढ़ाकर पांच किया जाए। उनका कहना है कि आज के समय में अधिकतर कर्मचारी अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

नए प्रस्ताव के अनुसार परिवार इकाई इस प्रकार मानी जाए—

  • कर्मचारी और जीवनसाथी मिलकर एक इकाई

  • माता-पिता को अलग-अलग दो इकाइयों के रूप में शामिल किया जाए

  • कुल मिलाकर पांच इकाइयों के आधार पर वेतन तय हो

यूनियनों का तर्क है कि जब वास्तविक जीवन में कर्मचारी पर पांच लोगों का आर्थिक बोझ है, तो वेतन भी उसी आधार पर तय होना चाहिए।


अगर मांग स्वीकार हुई तो कितना बढ़ सकता है वेतन

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस प्रस्ताव को मान लेती है तो वेतन में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। मौजूदा समय में जो न्यूनतम वेतन लगभग अठारह हजार रुपये है, वह बढ़कर पचास हजार से सत्तर हजार रुपये के बीच पहुंच सकता है। इसके साथ ही अन्य भत्तों में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और अन्य सुविधाएं भी इसी अनुपात में बढ़ सकती हैं। इस बदलाव का सीधा असर लाखों केंद्रीय कर्मचारियों की आय पर पड़ेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।


पेंशन और भत्तों पर भी पड़ेगा असर

वेतन बढ़ने का असर केवल वर्तमान कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पेंशन व्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यदि मूल वेतन में वृद्धि होती है तो पेंशन की गणना भी उसी आधार पर संशोधित की जाएगी। इसके अलावा महंगाई भत्ते में भी हर छमाही वृद्धि का आधार बढ़ जाएगा, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा।


क्यों उठ रही है यह मांग

कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में जीवनयापन की लागत तेजी से बढ़ी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, किराया और दैनिक जरूरतों के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में तीन सदस्यीय परिवार के आधार पर वेतन तय करना वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उनका तर्क है कि आज के समय में अधिकांश कर्मचारियों पर माता-पिता की जिम्मेदारी भी होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मांग स्वीकार की जाती है तो सरकार पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ सकता है। इससे केंद्र सरकार के बजट पर असर पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है।  हालांकि कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यह केवल वेतन वृद्धि नहीं बल्कि जीवन स्तर को वास्तविकता के अनुसार संतुलित करने की कोशिश है।


आठवें वेतन आयोग को लेकर उठी यह मांग अब बड़ा मुद्दा बन चुकी है। परिवार इकाई को तीन से बढ़ाकर पांच करने का प्रस्ताव यदि लागू होता है, तो यह सरकारी वेतन प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है। अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है, जो लाखों कर्मचारियों के भविष्य को प्रभावित करेगा।