आरजी कर दुष्कर्म और हत्या मामला : संदीप घोष पर कार्रवाई की मंजूरी, तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भी गिरी गाज
पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज दुष्कर्म और हत्या मामले में बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व प्रधानाचार्य संदीप घोष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मंजूरी दे दी है। मामले में तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है।
दि राइजिंग न्यूज | 19 मई 2026
आरजी कर मामले में सरकार का बड़ा फैसला
पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल दुष्कर्म तथा हत्या मामले में राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राज्य सरकार की ओर से पूर्व प्रधानाचार्य संदीप घोष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मंजूरी दिए जाने के बाद इस प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। सरकार का कहना है कि मामले में अब जांच एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ सकेंगी और कथित रूप से जुड़े सभी लोगों की भूमिका की गहराई से पड़ताल की जाएगी। इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत में आरोप और प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस पूरे मामले को राज्य की न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया है। उन्होंने कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे बंगाल को झकझोर दिया था और जनता लंबे समय से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रही थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना काम पूरी कठोरता से करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।
सामाजिक माध्यमों पर मुख्यमंत्री ने क्या कहा
मुख्यमंत्री ने सामाजिक माध्यमों पर जारी अपने संदेश में कहा कि उन्हें इस संवेदनशील मामले में एक नैतिक और सकारात्मक निर्णय लेने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि “अभया” के साथ जो अमानवीय घटना हुई, उसके असली दोषियों की पहचान कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य की जनता लंबे समय से इस मामले में सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रही थी और अब सरकार उस दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है। उन्होंने पीड़िता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की।
पूर्व सरकार पर लगाए गए गंभीर आरोप
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस मामले की जांच को प्रभावित करने और दबाने की कोशिश की गई थी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया को लंबे समय तक भटकाने का प्रयास किया गया ताकि वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक होने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का मानना है कि लोकतंत्र में कानून से ऊपर कोई नहीं होता और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
संदीप घोष पर क्या है पूरा मामला
आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य संदीप घोष पहले से ही कई गंभीर आरोपों के घेरे में रहे हैं। अब सरकार की ओर से कानूनी कार्रवाई की मंजूरी मिलने के बाद जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ आगे की प्रक्रिया तेज करने का रास्ता साफ हो गया है। सूत्रों के अनुसार जांच में अस्पताल प्रशासन की भूमिका, घटना के बाद उठाए गए कदमों और कथित अनियमितताओं की भी विस्तार से जांच की जा सकती है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई
राज्य सचिवालय नवान्न में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने बताया कि मामले की जांच में कथित लापरवाही, प्रक्रिया में गड़बड़ी और प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन के आरोपों के चलते तीन भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे कठोर कदम उठाए जाएंगे।
किन अधिकारियों पर गिरी निलंबन की गाज
निलंबित अधिकारियों में पूर्व कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल, पूर्व पुलिस उपायुक्त अभिषेक गुप्ता और पुलिस उपायुक्त इंदिरा मुखर्जी का नाम शामिल बताया गया है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों ने पीड़िता के परिवार को कथित रूप से प्रभावित करने की कोशिश की थी। साथ ही बिना लिखित अनुमति के पत्रकार वार्ता आयोजित करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। सरकार का दावा है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पूरे देश में चर्चा का विषय बना मामला
आरजी कर दुष्कर्म और हत्या मामला लगातार पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटना के बाद चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर कई सवाल उठे थे। अब राज्य सरकार की ताजा कार्रवाई के बाद पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से भी इस मामले की निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय की मांग की जा रही है।
बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले में उठाए गए कदम आने वाले समय में बंगाल की राजनीति पर भी बड़ा असर डाल सकते हैं। एक ओर सरकार इसे न्याय और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग सवाल उठा रहा है। फिलहाल पूरे राज्य की नजर अब जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और अदालत की प्रक्रिया पर टिकी हुई है। जनता को उम्मीद है कि लंबे समय से चर्चा में बने इस मामले में जल्द सच्चाई सामने आएगी और पीड़िता के परिवार को न्याय मिलेगा।