आगरा में गांधी स्मारक का बिजली कनेक्शन कटा:गांधी जयंती पर धूल-गंदगी के बीच होगा माल्यार्पण, 4 लाख का बिल बकाया

Oct 01, 2026 - 20:44
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आगरा में गांधी स्मारक का बिजली कनेक्शन कटा:गांधी जयंती पर धूल-गंदगी के बीच होगा माल्यार्पण, 4 लाख का बिल बकाया
आगरा के यमुना ब्रिज स्थित गांधी स्मारक की हालत खराब है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर यहां माल्यार्पण धूल और गंदगी के बीच होगा। स्मारक का बिजली कनेक्शन भी बिल जमा न होने के कारण कटा हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुरातत्व विभाग की अनदेखी से स्मारक में सुविधाओं की कमी है। कमरों में धूल और गंदगी जमा है। महात्मा गांधी 1929 में आगरा आए थे और तबीयत खराब होने पर 11 दिन इसी जगह रुके थे। पहले इसकी देखरेख नगर निगम करता था, अब पुरातत्व विभाग के पास है। स्मारक में गांधीजी से जुड़ी तस्वीरें और सामग्री हैं, लेकिन उनका ठीक से ध्यान नहीं रखा जा रहा। स्मारक के कमरों की चाबी चौकीदार के पास है, जबकि मुख्य गेट की चाबी सामने रहने वाली महिला के पास रहती है। वह मंदिर में पूजा के लिए आने वालों के लिए गेट खोलती हैं। टोरंट पावर ने 29 फरवरी 2020 को 1,28,277 रुपये के बकाया बिल का नोटिस दिया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, बिल अब करीब चार लाख रुपये तक पहुंच गया है, जिससे बिजली सप्लाई बंद है। परिसर में मौजूद प्राचीन शिव मंदिर की छत को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है। इसकी सूचना पुरातत्व विभाग को देकर पेड़ से संभावित नुकसान की आशंका जताई गई थी। आरोप है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई और पेड़ मंदिर की छत पर गिर गया, जिससे छत के पत्थर क्षतिग्रस्त हो गए। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या भी सामने आई। अब स्थानीय लोगों को छत के और क्षतिग्रस्त होने से हादसे की आशंका है। स्मारक की विद्युत व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बकाया बिजली बिल जमा न होने के कारण टोरंट पावर ने कनेक्शन काट दिया है। इससे स्मारक में रोशनी की व्यवस्था प्रभावित है। बताया गया है कि 29 फरवरी 2020 को 1,28,277 रुपये के बकाया को लेकर टोरंट की ओर से नोटिस जारी किया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके बाद भी भुगतान नहीं हुआ और बकाया अब करीब चार लाख रुपये तक पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांधी जयंती पर हर साल अधिकारी और जनप्रतिनिधि स्मारक पहुंचकर माल्यार्पण और कार्यक्रम करते हैं, लेकिन वर्षभर इसकी नियमित देखरेख पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उनका कहना है कि गांधीजी के स्वच्छता और सादगी के संदेश को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित रखने के बजाय स्मारक की नियमित सफाई, बिजली, सुरक्षा और संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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