आगरा में साइबर ठगों के झांसे से बचे बुजुर्ग:खाते से फिर से उड़ गए 22 लाख, शातिरों ने एफडी तोड़ रकम निकाल ली

Oct 08, 2026 - 21:54
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आगरा में साइबर ठगों के झांसे से बचे बुजुर्ग:खाते से फिर से उड़ गए 22 लाख, शातिरों ने एफडी तोड़ रकम निकाल ली
आगरा में बुजुर्ग अधिवक्ता साइबर ठगों के जाल में फंसने से तो बच गया, लेकिन उनकी रकम फिर से खाते से निकल गई। उनकी बैंक एफडी तोड़कर शातिरों ने 22 लाख रुपए ट्रांसफर कर लिए। बैंक से मैसेज आने के बाद बुजुर्ग को जानकारी हुई। उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब पढ़िए पूरा मामला रकाबगंज निवासी बुजुर्ग अधिवक्ता का फेडरल बैंक में खाता है। उन्होंने पुलिस को बताया कि 29 सितंबर को उनके पास एक फोन कॉल आई। कॉलर ने खुद को ग्रीन गैस कंपनी का अधिकृत कर्मचारी बताया। कहा कि आपके खाते पर सब्सिडी की रकम दी जानी है। इसके लिए आपको 12 रुपये का भुगतान करना होगा। उन्होंने एक साल पहले ही अपना पीएनजी कनेक्शन बंद किया था, इसलिए उन्हें शक हो गया। उन्होंने तुरंत कॉल काट दी। अगले दिन अपनी रकम सुरक्षित करने के लिए बैंक गए और बचत खातों में जमा 22.88 लाख रुपये की एफडी करवा दी। लेकिन, 2 अक्टूबर को वह एफडी तुड़वा ली गई। बैंक से संदेश आने पर उन्हें इस बड़ी सेंधमारी की जानकारी मिली। एफडी की जानकारी केवल बैंक कर्मचारियों एफडी की जानकारी केवल बैंक कर्मचारियों के पास थी। ऐसे में एफडी टूटने और रकम ट्रांसफर होने के पीछे अंदरूनी मिलीभगत की आशंका से फिलहाल इन्कार नहीं किया जा सकता है। आशंका यह भी है कि बुजुर्ग के मोबाइल में कोई एपीके फाइल डाउनलोड करा दी गई हो, जिससे अपराधियों को रिमोट एक्सेस मिल गया और बैंक के ओटीपी उन तक आसानी से पहुंच गए। ग्रीन गैस के बंद कनेक्शन निशाने पर ग्रीन गैस के नाम पर धोखाधड़ी का यह पहला मामला नहीं है। कंपनी के आगरा में कुल 1.10 लाख कनेक्शन हैं, जिनमें से 75,000 चालू और 35,000 बंद पड़े हैं। साइबर ठग इन्हीं कनेक्शनों का डाटा इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। अब तक 20 से 25 लोग ठगी का शिकार हो चुके हैं लेकिन पुलिस आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही है

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