अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, ‘दिल्ली के गॉडफादर’ बयान पर सियासत तेज

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को कथित विवादित बयान मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने फिलहाल कठोर कार्रवाई पर रोक लगाई है, लेकिन विदेश यात्रा पर प्रतिबंध समेत कई शर्तें भी लागू की हैं। इस फैसले के बाद बंगाल की राजनीति में सियासी घमासान और तेज हो गया है।

अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, ‘दिल्ली के गॉडफादर’ बयान पर सियासत तेज

दि राइजिंग न्यूज | कोलकाता | 21 मई 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को कथित विवादित बयान मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली। अदालत ने फिलहाल उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी है। हालांकि अदालत ने उनके बयान पर नाराजगी भी जाहिर की और जांच में पूरा सहयोग करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इस मामले ने एक बार फिर बंगाल की सियासत को गरमा दिया है और भाजपा तथा तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।

विवादित बयान से शुरू हुआ राजनीतिक घमासान

यह विवाद उस बयान को लेकर शुरू हुआ था जिसमें अभिषेक बनर्जी ने चुनावी सभा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर कथित तौर पर “दिल्ली का गॉडफादर” जैसी टिप्पणी की थी। भाजपा नेताओं ने इस बयान को अपमानजनक बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता चला गया। तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि भाजपा ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ करार दिया।

अदालत ने क्यों दी राहत

मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा कि फिलहाल अभिषेक बनर्जी से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं दिखाई देती। अदालत ने माना कि जांच जारी रह सकती है, लेकिन इस समय उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई उचित नहीं होगी। इसी आधार पर अदालत ने इकतीस जुलाई तक उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। इस फैसले को तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

विदेश यात्रा पर लगाई गई रोक

हालांकि अदालत ने राहत देने के साथ कई सख्त शर्तें भी लागू की हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी बिना अदालत की अनुमति के विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा उन्हें जांच एजेंसियों द्वारा भेजे गए हर नोटिस का जवाब देना होगा और पूछताछ में पूरा सहयोग करना पड़ेगा। अदालत ने कहा कि जांच प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए और मामले की सच्चाई सामने आना जरूरी है।

भाजपा और तृणमूल के बीच बढ़ा टकराव

अदालत के फैसले के बाद बंगाल की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने कहा कि अदालत ने राहत जरूर दी है, लेकिन टिप्पणी पर सवाल भी उठाए हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि विपक्षी नेताओं को डराने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्टी नेताओं ने कहा कि सच सामने आने के बाद भाजपा की राजनीति बेनकाब हो जाएगी। दोनों दलों के बीच यह मामला अब राजनीतिक प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है।

जांच एजेंसियों को अदालत की खुली छूट

उच्च न्यायालय ने जांच अधिकारी को मामले की जांच जारी रखने की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि अगर जांच में सहयोग नहीं किया जाता है तो पुलिस दोबारा अदालत का रुख कर सकती है। इससे साफ संकेत मिला है कि मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और बड़ा राजनीतिक विवाद देखने को मिल सकता है। जांच एजेंसियां अब बयान और संबंधित साक्ष्यों की पड़ताल में जुटी हुई हैं।

बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है गर्मी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। भाजपा इस बयान को जनता के बीच जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे विपक्ष की साजिश बताकर जवाबी हमला कर रही है। ऐसे में अदालत का यह फैसला राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई और जांच की दिशा पर टिकी हुई है।