प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी उपहार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी उपहार में देने के बाद पारले एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जर्मनी से ट्रेनिंग लेकर शुरू हुई इस भारतीय कंपनी की कहानी आज देश के सबसे भरोसेमंद ब्रांड्स में गिनी जाती है।
दि राइजिंग न्यूज | 20 मई 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारतीय मिठास का स्वाद चखाने के लिए ‘मेलोडी’ टॉफी उपहार में दिए जाने के बाद देशभर में एक बार फिर पारले ब्रांड चर्चा का केंद्र बन गया है। बचपन की यादों से जुड़ी यह टॉफी केवल एक स्वाद नहीं, बल्कि भारतीय भरोसे और स्वदेशी सफलता की कहानी भी है। बहुत कम लोग जानते हैं कि आज करोड़ों भारतीयों के दिलों पर राज करने वाला पारले ब्रांड एक छोटे से कन्फेक्शनरी कारोबार से शुरू हुआ था, जिसने धीरे-धीरे पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना ली।
पारले की शुरुआत उस दौर में हुई थी जब भारत में विदेशी कंपनियों का दबदबा तेजी से बढ़ रहा था। उस समय भारतीय बाजार में स्वदेशी उत्पादों की कमी थी और आम लोगों के पास सीमित विकल्प मौजूद थे। ऐसे माहौल में मोहनलाल दयाल ने भारतीय स्वाद और गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए कन्फेक्शनरी कारोबार शुरू करने का सपना देखा। लेकिन कारोबार शुरू करने से पहले उन्होंने इस क्षेत्र की गहराई से समझ हासिल करने का फैसला किया। ‘मेलोडी’ टॉफी की बात करें तो यह केवल बच्चों की पसंद नहीं रही, बल्कि हर उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय बन गई। इसकी खास मिठास और चॉकलेट स्वाद ने इसे बाजार में अलग पहचान दिलाई। कई दशकों बाद भी इस टॉफी की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। आज भी किराना दुकानों से लेकर बड़े बाजारों तक ‘मेलोडी’ की मांग बनी रहती है।
प्रधानमंत्री मोदी के उपहार ने फिर बढ़ाई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस टॉफी को विदेशी नेता को उपहार में देना केवल एक सामान्य सौगात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारतीय ब्रांड्स को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। इससे यह संदेश गया कि भारत के पारंपरिक और लोकप्रिय उत्पाद अब दुनिया में अपनी अलग जगह बना रहे हैं।
पारले की सफलता का सबसे बड़ा कारण उसकी गुणवत्ता, भरोसा और आम लोगों से जुड़ाव है। कंपनी ने समय के साथ खुद को बदला, लेकिन अपने मूल स्वाद और पहचान को हमेशा बरकरार रखा। यही वजह है कि आज भी पारले भारतीय बाजार में मजबूत पकड़ बनाए हुए है।
पारले केवल एक कंपनी नहीं, बल्कि भारतीय उद्यमिता, मेहनत और स्वदेशी सोच की मिसाल बन चुका है। छोटे स्तर से शुरू होकर वैश्विक पहचान तक पहुंचने की इसकी कहानी आज लाखों युवाओं और कारोबारियों के लिए प्रेरणा मानी जाती है।