अडानी को लाइसेंस देने से पहले वित्तीय क्षमता जांचें:नोएडा डेटा-सेंटर के लिए बिजली लाइसेंस देने का विरोध, 63 करोड़ की इक्विटी का मांगा हिसाब

Oct 16, 2026 - 18:55
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अडानी को लाइसेंस देने से पहले वित्तीय क्षमता जांचें:नोएडा डेटा-सेंटर के लिए बिजली लाइसेंस देने का विरोध, 63 करोड़ की इक्विटी का मांगा हिसाब
नोएडा के सेक्टर-62 स्थित डेटा सेंटर पार्क में अडानी समूह की कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सवाल उठाए हैं। परिषद ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) में कंपनी की वित्तीय क्षमता, वैधानिक पात्रता और तकनीकी योजना को लेकर आपत्तियां दर्ज कराईं। परिषद ने कहा कि जब तक कंपनी की स्वतंत्र वित्तीय क्षमता और लाइसेंस की सभी अनिवार्य शर्तों का सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस स्टेप इलेवन लिमिटेड (AESSEL) को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के मामले में आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह व गिरिश कुमार वैश्य के समक्ष सुनवाई हुई। परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कंपनी की ओर से प्रस्तावित निवेश और इक्विटी की उपलब्धता पर सवाल उठाए। अडानी समूह की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय सेन ने पक्ष रखा और आयोग से कंपनी को लाइसेंस देने की सिफारिश की। ₹211 करोड़ के निवेश का स्रोत बताने की मांग परिषद ने सवाल किया कि कंपनी ने ₹211.10 करोड़ के प्रस्तावित निवेश और ₹63.33 करोड़ की इक्विटी का जो ब्योरा दिया है, उसके लिए वास्तविक पूंजी कहां से आएगी? शेष धनराशि जुटाने के ठोस स्रोत क्या हैं? वर्मा ने कहा कि बिजली वितरण का लाइसेंस केवल किसी बड़े औद्योगिक समूह के नाम या निवेश के दावे के आधार पर नहीं दिया जा सकता। आवेदक कंपनी को खुद सभी वैधानिक शर्तें पूरी करनी होंगी। परिषद ने विस्तृत बिजनेस प्लान और नेटवर्क विकास से जुड़े जरूरी विवरण बाद में देने की बात पर भी आपत्ति जताई। उसका सवाल है कि जब वित्तीय और तकनीकी योजना के अहम पहलुओं की पूरी जांच नहीं हुई है, तो लाइसेंस देने पर अंतिम फैसला कैसे लिया जा सकता है? बिजली की लागत बढ़ने का भी मुद्दा उठाया परिषद ने बिजली आपूर्ति की अनुमानित लागत पर भी चिंता जताई। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, औसत आपूर्ति लागत वर्ष 2027 में ₹6.53 प्रति यूनिट से बढ़कर वर्ष 2036 में ₹8.23 प्रति यूनिट तक पहुंच सकती है। परिषद ने प्रस्तावित 0.5% वितरण हानि, 11 केवी नेटवर्क की लागत और बिजली खरीद व्यवस्था की जांच कराने की मांग की। इसके साथ ही नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (NPCL) और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के क्षेत्रों का स्पष्ट सीमांकन करने की मांग की गई। परिषद का कहना है कि लाइसेंस से जुड़ी व्यवस्था के कारण दूसरे बिजली उपभोक्ताओं पर कोई अनुचित वित्तीय बोझ नहीं पड़ना चाहिए। शासनादेश और अधिसूचना की वैधानिकता पर भी सवाल परिषद ने 30 जून 2022 के शासनादेश और 10 मार्च 2023 की सरकारी अधिसूचना के संदर्भ में भी जांच की मांग की। वर्मा ने कहा कि कंपनी की स्वतंत्र कानूनी पात्रता और सभी अनिवार्य शर्तों के अनुपालन का परीक्षण जरूरी है। कंपनी के पक्ष में पेश की गई कानूनी राय आयोग की स्वतंत्र जांच का विकल्प नहीं हो सकती। आयोग को सभी आपत्तियों और दस्तावेजों का निष्पक्ष परीक्षण करना चाहिए। अडानी समूह ने जवाब के लिए मांगा एक सप्ताह सुनवाई के दौरान अडानी समूह की ओर से पेश सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय सेन ने कंपनी को लाइसेंस देने की सिफारिश की। उन्होंने उपभोक्ता परिषद की ओर से उठाए गए सवालों और आपत्तियों का जवाब देने के लिए आयोग से एक सप्ताह का समय मांगा। अब परिषद की आपत्तियों पर कंपनी का जवाब मिलने के बाद आयोग को आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लेना है। उपभोक्ता परिषद की मांग है कि AESSEL की वास्तविक पूंजी, वित्तीय क्षमता, वैधानिक पात्रता, तकनीकी व्यवहार्यता और उपभोक्ताओं पर संभावित असर की पूरी जांच के बाद ही लाइसेंस पर अंतिम फैसला किया जाए।

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