अधिवक्ता हत्याकांड में 2 हत्यारोपी तीसरे दिन भी फरार:मुख्य आरोपी की पत्नी-एक बेटा पकड़ से दूर, अज्ञात भी नहीं हो सके चिह्नित
अधिवक्ता हत्याकांड: 3 दिन बाद भी फरार हैं देवेंद्र मिश्रा की पत्नी और बेटा नामजद अमरेंद्र और शैल मिश्रा को नहीं पकड़ सकी पुलिस, 8 से 10 अज्ञात आरोपियों की पहचान भी बाकी; अफसर बोले- गिरफ्तारी के प्रयास जारी प्रयागराज में अधिवक्ता सतीश चंद्र श्रीवास्तव की हत्या के मामले में तीन दिन बाद भी पुलिस सभी आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। मुख्य आरोपी देवेंद्र नाथ मिश्रा और उसके बेटे नृपेंद्र मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, लेकिन देवेंद्र का दूसरा बेटा अमरेंद्र मिश्रा और पत्नी शैल मिश्रा अब तक फरार हैं। इसके अलावा एफआईआर में 8 से 10 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और अज्ञात लोगों की पहचान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। दो नामजद आरोपियों की तलाश जारी 15 अक्टूबर को कर्नलगंज थाना क्षेत्र में हुई इस वारदात में सतीश की पत्नी वर्षा श्रीवास्तव की तहरीर पर देवेंद्र नाथ मिश्रा उर्फ झून्ने, उसके दोनों बेटों अमरेंद्र और नृपेंद्र तथा पत्नी शैल मिश्रा को नामजद किया गया था। पुलिस देवेंद्र और नृपेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब अमरेंद्र और शैल की गिरफ्तारी बाकी है। परिवार ने घटना के बाद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था। हालांकि, अब तक दोनों फरार आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। वीडियो फुटेज से भी करनी है पहचान हत्याकांड से जुड़े दो वीडियो सामने आ चुके हैं। पहले वीडियो में दोनों पक्षों के बीच मारपीट होती दिखाई दे रही है। इसमें पुलिसकर्मी भी नजर आ रहे हैं। दूसरे, 16 सेकेंड के वीडियो में देवेंद्र मिश्रा एक अन्य व्यक्ति के साथ पिस्टल पकड़े युवक को ले जाता दिखाई देता है। युवक की पहचान और उसकी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एफआईआर में नामजद अज्ञात लोगों की पहचान करना भी पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। जांच में वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाना जरूरी है कि घटना के समय कौन-कौन मौजूद था और किसकी क्या भूमिका रही। जमीन को लेकर था विवाद पुलिस के मुताबिक, सतीश चंद्र श्रीवास्तव और देवेंद्र नाथ मिश्रा के बीच जमीन पर कब्जे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। 15 अक्टूबर को विवादित संपत्ति पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान मारपीट हुई और देवेंद्र ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से सतीश को गोली मार दी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मामले में हत्या के आरोपों के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 30 भी जोड़ी गई है। पुलिस का कहना है कि लाइसेंसी रिवॉल्वर का इस्तेमाल किए जाने के कारण शस्त्र लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन के पहलू की भी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। एसीपी कर्नलगंज विवेक यादव ने बताया कि टीमें लगाई गई हैं। उनके हर संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। अज्ञात आरोपियों को वीडियो व सीसीटीवी फुटेज से चिहि्नत करने का प्रयास किया जा रहा है।
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