अधिवक्ताओं की 14 सूत्रीय मांगें राष्ट्रपति तक पहुंचीं:बांदा में सुरक्षा कानून लागू करने की मांग, टोल छूट और 25 लाख कल्याण राशि

Sep 30, 2026 - 15:34
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अधिवक्ताओं की 14 सूत्रीय मांगें राष्ट्रपति तक पहुंचीं:बांदा में सुरक्षा कानून लागू करने की मांग, टोल छूट और 25 लाख कल्याण राशि
बांदा में बुधवार को आज दोपहर में 1 बजे जिला अधिवक्ता संघ, बांदा ने अधिवक्ताओं की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर राष्ट्रपति को 14 सूत्रीय मांगपत्र भेजा है। संघ ने यह पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा है। पत्र में अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने से लेकर न्यायिक जवाबदेही कानून बनाने, अधिवक्ताओं को राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल से छूट देने और अधिवक्ता कल्याण की राशि बढ़ाने समेत कई मांगें उठाई गई हैं। जिला अधिवक्ता संघ के अनुसार 14 और 16 सितंबर को हुई आमसभाओं में अधिवक्ताओं की समस्याओं पर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए गए थे। 30 सितंबर को राष्ट्रपति को पत्र भेजा इन्हीं प्रस्तावों के आधार पर 30 सितंबर को राष्ट्रपति को पत्र भेजा गया। संघ की प्रमुख मांगों में उत्तर प्रदेश अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम का प्रारूप प्रस्तुत कर उसे जल्द लागू करना शामिल है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन के नाम पर अधिवक्ता संघों से हड़ताल नहीं करने की अंडरटेकिंग लिए जाने का भी विरोध किया गया है। अधिवक्ता संघ ने न्यायपालिका में पारित होने वाले आदेशों और अधिवक्ताओं के प्रति की जाने वाली टिप्पणियों की समीक्षा के लिए न्यायिक जवाबदेही अधिनियम संसद के अगले सत्र में लाने की मांग की है। साथ ही न्यायिक नियुक्ति आयोग या भारतीय न्यायिक सेवा के गठन की मांग भी उठाई गई है। विचार-विमर्श करने की मांग की पत्र में देशभर के अधिवक्ताओं को राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवागमन के लिए टोल शुल्क से छूट देने, जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट लागू करने और अधिवक्ता अधिनियम में किसी भी संशोधन से पहले देश के अधिवक्ता संघों से विचार-विमर्श करने की मांग की गई है। संघ ने नए अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन भत्ता और 70 वर्ष की आयु पूरी करने वाले अधिवक्ताओं को मानक भत्ता देने की मांग की है। 25 लाख रुपये करने की मांग अधिवक्ता कल्याण की राशि पांच लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की भी मांग रखी गई है।इसके अलावा न्यायिक परिसरों के निर्माण और पुनर्निर्माण के दौरान अधिवक्ताओं के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था के लिए बजट में प्रावधान करने की मांग की गई है। संघ ने बार काउंसिल के सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए अधिकतम दो कार्यकाल की सीमा तय करने, यूपी रेंट कंट्रोल एक्ट के न्यायिक क्षेत्राधिकार को प्रशासनिक न्यायालयों से वापस लेकर दीवानी न्यायालयों को देने तथा शिकायतों के निस्तारण के लिए गठित ग्रीवांस रिड्रेसल कमेटियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने की मांग भी की है।

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