बांदा में कोडीन कफ सीरप के अवैध कारोबार का खुलासा:10-12 युवकों का डिलीवरी नेटवर्क, प्रति गत्ता 500 से 2 हजार रुपए
बांदा में कोडीनयुक्त कफ सीरप के अवैध कारोबार की जांच में पुलिस को सप्लाई नेटवर्क को लेकर नई जानकारी मिली है। सोमवार को कस्टडी रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में सामने आया कि कफ सीरप की खेप अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने के लिए युवकों का नेटवर्क तैयार किया गया था। करीब 10 से 12 युवकों के इस नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई है। दूरी के हिसाब से इन्हें प्रति गत्ता 500 से 2,000 रुपए तक दिए जाते थे। पूछताछ में सामने आया कि कस्बे और आसपास के क्षेत्रों के युवकों को जरूरत के मुताबिक कफ सीरप पहुंचाने का काम दिया जाता था। उन्हें माल किसके लिए है और पूरी खेप कहां से आई है, इसकी जानकारी नहीं दी जाती थी। कम दूरी की डिलीवरी के लिए करीब 500 रुपए, जबकि दूर के क्षेत्रों तक माल पहुंचाने पर 2,000 रुपए तक भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, अलग-अलग युवकों से डिलीवरी कराने का मकसद मुख्य आरोपितों की पहचान और गतिविधियों को छिपाए रखना था। ग्रामीण क्षेत्रों तक भी खेप पहुंचाई जाती तीन सितंबर को बिसंडा थाना क्षेत्र के पुनाहुर में पकड़ी गई कफ सीरप की खेप की जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि सप्लाई केवल बांदा तक सीमित नहीं थी। बांदा और चित्रकूट के अलावा मध्य प्रदेश के सतना, मझगवां और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक भी खेप पहुंचाई जाती थी। अलग-अलग युवकों से डिलीवरी कराई लगातार एक ही व्यक्ति की आवाजाही से पुलिस की नजर न पड़े, इसके लिए अलग-अलग युवकों से डिलीवरी कराई जाती थी। रिमांड के दौरान अतर्रा, चित्रकूट और सतना की कई फर्मों के नाम भी पुलिस की जांच में सामने आए हैं। विवेचक गौरव मिश्रा ने बताया कि इन फर्मों से जुड़े खरीद-बिक्री और भुगतान का ब्योरा जुटाया जाएगा। इसके लिए जीएसटी विभाग को पत्र भेजकर संबंधित फर्मों के करंट खातों में हुए लेनदेन का विवरण मांगा जाएगा। बैंक खातों, बिल और जीएसटी अभिलेखों का मिलान कर यह पता लगाया जाएगा कि सीरप की खरीद के लिए रकम किसने दी और भुगतान किन लोगों या फर्मों को किया गया। पुलिस डिलीवरी नेटवर्क से जुड़े 10 से 12 युवकों की पहचान में भी जुटी है। आरोपितों के मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल और वाट्सएप चैट से मिले संपर्कों का मिलान किया जा रहा है। यह पता लगाया जा रहा है कि युवकों को डिलीवरी का काम किसके जरिए मिलता था, माल कहां से लिया जाता था और डिलीवरी के बाद भुगतान कैसे किया जाता था। 72 करोड़ रुपए के कफ सीरप भुगतान का कोई रिकॉर्ड रखा जाता था या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस की जांच में फरवरी से अगस्त तक करीब 72 करोड़ रुपए के कफ सीरप की खपत की जानकारी सामने आई है। कथित कारोबार का आंकड़ा करीब 75 करोड़ रुपए सितंबर में पकड़ी गई करीब तीन करोड़ रुपए की खेप को जोड़ने पर कथित कारोबार का आंकड़ा करीब 75 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। अब पुलिस फर्मों और डिलीवरी नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका का सत्यापन कर रही है। साक्ष्य मिलने पर संबंधित ठिकानों पर दबिश देकर पूछताछ और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।
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