बच्चों को पॉक्सो और बाल सुरक्षा के अधिकार बताए:ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने गुड टच-बैड टच और बाल विवाह के नियम समझाए
उन्नाव। गांधी जयंती के पूर्व गुरुवार को पुरवा में बच्चों को पॉक्सो (POCSO) कानून और बाल सुरक्षा से जुड़े अधिकारों की जानकारी देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश और जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्षता/निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में कक्षा 9 से 12 तक के छात्र-छात्राओं को यौन अपराधों से बचाव और कानूनी प्रावधानों के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पुरवा हिमानी गौतम ने बच्चों को पॉक्सो यानी प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपने अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। किसी भी प्रकार के गलत स्पर्श, व्यवहार या उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहने के बजाय अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित जिम्मेदार लोगों को इसकी जानकारी देनी चाहिए। बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में भी समझाया गया। उन्हें बताया गया कि अपने शरीर को लेकर किसी भी असहज या गलत व्यवहार को पहचानना जरूरी है। जागरूकता के जरिए बच्चों को संभावित अपराधों से बचाने और समय पर शिकायत करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि बाल विवाह कानून के तहत विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष है। वहीं POCSO कानून में 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को बच्चा माना गया है।
मजिस्ट्रेट ने बच्चों को समझाया कि कम उम्र में विवाह या किसी भी प्रकार के यौन शोषण से जुड़ी परिस्थितियों में कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक है। बच्चों को कानून की जानकारी देकर उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन SALSA यानी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के जागरूकता अभियान के तहत किया गया। प्रधानाचार्य और विद्यालय स्टाफ की ओर से कम समय में कार्यक्रम आयोजित कराने और बड़ी संख्या में बच्चों को इसमें शामिल करने की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने कानून और बाल सुरक्षा से जुड़े विषयों की जानकारी ली तथा अपनी जिज्ञासाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।
मजिस्ट्रेट ने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को कानून की जानकारी देकर उन्हें सुरक्षित और सजग बनाना है, ताकि वे किसी भी अनुचित व्यवहार को पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर समय रहते मदद ले सकें।
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