बदायूं में गोवंशों की मौत पर कार्रवाई में दोहरा रवैया:कहीं सचिव सस्पेंड, तो कहीं गोवध अधिनियम में केस दर्ज

Sep 30, 2026 - 09:03
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बदायूं में गोवंशों की मौत पर कार्रवाई में दोहरा रवैया:कहीं सचिव सस्पेंड, तो कहीं गोवध अधिनियम में केस दर्ज
बदायूं में गोवंशों की मौत के मामलों के बाद प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय है, लेकिन अलग-अलग गोशालाओं में सामने आई लापरवाही पर कार्रवाई का तरीका एक जैसा नहीं है। म्याऊं के अभिगांव और सालारपुर के ब्यौर में गोशालाओं की बदहाली सामने आने पर पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया। वहीं उसावां ब्लॉक की गोशालाओं में गोवंशों की मौत के मामले में पंचायत सचिव पर गोवध निवारण अधिनियम समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शिकायतों और लापरवाही का स्वरूप लगभग एक जैसा है तो जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई का तरीका अलग क्यों है? उसहैत थाने में मंगलवार को दर्ज मुकदमों के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया। टिकरी पुख्ता की अस्थायी गोशाला में पांच गोवंशों की मौत के मामले में संचालक दानवीर यादव, कुलदीप, दर्शन सिंह और पंचायत सचिव अलख निरंजन को आरोपी बनाया गया है। तहरीर में गोवंशों के चारे-पानी और बारिश से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं करने, सरकारी धन के इस्तेमाल में गड़बड़ी और मृत गोवंशों को बिना पोस्टमॉर्टम हटाने के आरोप लगाए गए हैं। टिकरी पुख्ता में पांच गोवंशों की मौत, चार लोगों पर मुकदमा टिकरी पुख्ता की अस्थायी गोशाला में पांच गोवंशों की मौत के मामले में गोशाला संचालक समेत पंचायत सचिव को भी आरोपी बनाया गया है। तहरीर के मुताबिक, गोवंशों के लिए पर्याप्त चारे-पानी और बारिश से बचाव की व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा सरकारी धन के इस्तेमाल में गड़बड़ी और मृत गोवंशों को बिना पोस्टमॉर्टम हटाने के आरोप भी लगाए गए हैं। द्विकली पुख्ता में रिकॉर्ड और मौके की संख्या में अंतर द्विकली पुख्ता की गोशाला में निरीक्षण के दौरान दो गोवंश मृत और चार मरणासन्न मिले थे। जांच में मौके पर 180 गोवंश मिले, जबकि रिकॉर्ड में 200 गोवंशों के नाम पर भुगतान का उल्लेख था। इस मामले में भी गोशाला संचालक के साथ पंचायत सचिव अलख निरंजन को आरोपी बनाया गया। मृत गोवंशों को बिना पोस्टमॉर्टम दफनाने और गोशाला की व्यवस्थाओं में लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। अभिगांव और ब्यौर में सचिवों पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई दूसरी ओर म्याऊं के अभिगांव और सालारपुर के ब्यौर की गोशालाओं में जांच के बाद पंचायत सचिवों पर प्रशासनिक कार्रवाई की गई। दोनों गोशालाओं से जुड़े एनजीओ को ब्लैकलिस्ट किया गया और संचालकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए। संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारियों के निलंबन की संस्तुति भी की गई। इन मामलों में पंचायत सचिवों पर कार्रवाई निलंबन तक रही, जबकि उसावां ब्लॉक की गोशालाओं के मामले में पंचायत सचिव को आपराधिक मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। जिम्मेदारी तय करने के तरीके पर उठ रहे सवाल गोवंशों की मौत के मामलों में प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई की जा रही है, लेकिन अलग-अलग मामलों में अपनाए गए कार्रवाई के तरीकों ने जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ समान तरह की लापरवाही सामने आने पर पंचायत सचिव के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई हुई, वहीं दूसरे मामले में उसी पद पर तैनात पंचायत सचिव के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि अलग-अलग मामलों में जिम्मेदारी तय करने का आधार क्या है और कार्रवाई के पैमाने अलग क्यों हैं।

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