BHU में अव्वल छात्रों को मिला अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार:कुलपति बोले-अब हर साल 500 छात्रों का होगा चयन,लाना होगा 8.5 से अधिक सीजीपीए
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए पहली बार अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। शुक्रवार को स्वतंत्रता भवन में आयोजित समारोह में 332 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इनमें स्नातक के 173 और परास्नातक के 159 छात्र शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से इस पुरस्कार की शुरुआत की है। इसके तहत हर साल करीब 500 विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। समारोह में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा- विश्वविद्यालय के अस्तित्व का मूल उद्देश्य अकादमिक उत्कृष्टता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के वार्षिक कैलेंडर में विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव मनाने के लिए एक विशेष दिन शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को उनकी पढ़ाई के दौरान ही सम्मानित करना जरूरी है, ताकि उनकी उपलब्धियां दूसरे छात्रों को भी प्रेरित कर सकें। 8.5 या उससे अधिक सीजीपीए वालों को सम्मान यह पुरस्कार सम सेमेस्टर की परीक्षा में अपने कार्यक्रम में शीर्ष स्थान प्राप्त करने और 8.5 या उससे अधिक सीजीपीए हासिल करने वाले विद्यार्थियों को दिया गया। पुरस्कारों में कला संकाय के सबसे अधिक 92 विद्यार्थी शामिल रहे। विज्ञान संकाय के 78 और कृषि संकाय के 30 विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के आकार के आधार पर पुरस्कारों की संख्या तय की गई है। 100 से अधिक विद्यार्थियों वाले पाठ्यक्रम में तीन, 50 से 100 विद्यार्थियों वाले पाठ्यक्रम में दो और 50 से कम विद्यार्थियों वाले पाठ्यक्रम में एक पुरस्कार दिया जाता है। दूसरे छात्रों से प्रतिस्पर्धा करने का आह्वान कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने पुरस्कार पाने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने समारोह में मौजूद अन्य विद्यार्थियों से भी इन मेधावियों से प्रतिस्पर्धा करने और बेहतर प्रदर्शन के लिए चुनौती स्वीकार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अगले साल पुरस्कार पाने वाले विद्यार्थियों की सूची बदल भी सकती है। कुछ विद्यार्थी दुनिया में विश्वविद्यालय का नाम रोशन करेंगे, जबकि कुछ आगे चलकर इसी संस्थान में शिक्षक बनकर लौटेंगे।
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