भूमि विवादों पर अब पुलिस की जवाबदेही तय होगी:डीआईजी ने बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर के कप्तानों को 100-100 विवादों की सूची भेजी
बस्ती परिक्षेत्र में भूमि विवादों को लेकर पुलिस ने अब नया एक्शन प्लान तैयार किया है। बस्ती के डीआईजी संजीव त्यागी ने संतकबीरनगर समेत तीनों जिलों के एसपी को 100-100 ऐसे भूमि विवादों की सूची भेजी है, जिनमें पहले हत्या, हत्या के प्रयास या मारपीट जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। डीआईजी ने साफ किया है कि अब छोटे से छोटे भूमि विवाद को भी पुलिस गंभीरता से लेगी। विवाद की शुरुआत में ही पुलिस और राजस्व विभाग की मदद से उसका समाधान कराने की कोशिश की जाएगी, ताकि मामला आगे चलकर हिंसा में न बदले। तीन जिलों के 300 विवाद चिह्नित डीआईजी संजीव त्यागी ने बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर के पुलिस कप्तानों को 100-100 विवादों की सूची भेजी है। इन मामलों में पहले हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। पुलिस अब इन विवादों की लगातार निगरानी करेगी। डीआईजी के मुताबिक, कई गंभीर घटनाओं की जड़ भूमि विवाद रहे हैं। समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण कई बार छोटे विवाद हत्या और बलवे जैसी घटनाओं में बदल गए। इसी को देखते हुए पुलिस को शुरुआत से ही विवादों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। हर गांव-मोहल्ले में बीट पुलिस अधिकारी की जानकारी एक्शन प्लान के तहत हर गांव और मोहल्ले में तैनात बीट पुलिस अधिकारी का नाम, पद और मोबाइल नंबर सार्वजनिक किया जाएगा। इससे लोग भूमि विवाद या उससे जुड़े तनाव की जानकारी सीधे संबंधित पुलिसकर्मी को दे सकेंगे। थानों पर भूमि विवाद रजिस्टर भी अपडेट किया जाएगा। इसमें विवाद से जुड़ी जानकारी दर्ज रहेगी, जिससे पुलिस को पुराने और संवेदनशील मामलों की निगरानी करने में आसानी होगी। लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी डीआईजी ने अधिकारियों और कर्मचारियों को भूमि विवादों में लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। किसी विवाद की जानकारी होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई और मामला गंभीर घटना में बदल गया, तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी। शस्त्र के दुरुपयोग पर लाइसेंस निरस्त कराने की रिपोर्ट भूमि विवाद वाले मामलों में शस्त्र के दुरुपयोग की आशंका होने पर भी पुलिस नजर रखेगी। यदि किसी लाइसेंसधारी हथियार के दुरुपयोग की आशंका या मामला सामने आता है तो पुलिस लाइसेंस निरस्त कराने के लिए रिपोर्ट भेजेगी। डीआईजी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भूमि विवादों को शुरुआती स्तर पर ही गंभीरता से लिया जाए और राजस्व विभाग के साथ समन्वय कर विवादों का समाधान कराया जाए, ताकि भविष्य में हत्या, बलवा या मारपीट जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
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