बिना बैंक अनुमित 65 लाख में बेची मॉरगेज संपत्ति:अलीगढ़ में HDFC बैंक को 1.03 करोड़ की चपत, बैंक की अनुमति, NOC और सूचना के बिना कराई रजिस्ट्री
HDFC बैंक से 95 लाख रुपये का होम लोन लेकर गिरवी रखी गई संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा बैंक की अनुमति के बिना बेचने का मामला सामने आया है। बैंक की आंतरिक जांच में आरोप लगाया गया है कि कर्ज लेने वाले नेहा गुप्ता और सह-ऋणधारक रजनीश वार्ष्णेय ने रामबाग कॉलोनी स्थित मॉर्गेज प्रॉपर्टी का 213.20 वर्ग मीटर हिस्सा 25 जुलाई 2019 को पवन तिवारी के नाम 65 लाख रुपये में बेच दिया। बैंक का दावा है कि इस सौदे से उसके सुरक्षा हित प्रभावित हुए और उसे कुल 1,03,68,633 रुपये की वित्तीय क्षति हुई। बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक पवन सिंह की शिकायत पर दोनों के खिलाफ क्वार्सी में रविवार को एफआईआर दर्ज कराई गई है।
2016 में स्वीकृत हुआ था 95 लाख का होम लोन
HDFC बैंक के लखनऊ कार्यालय में कार्यरत वरिष्ठ प्रबंधक और विवेचना अधिकारी पवन सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में बताया कि बैंक ने होम लोन खाता संख्या 619899331 के तहत 30 मई 2016 को 95 लाख रुपये का ऋण वितरित किया था। इस ऋण में नेहा गुप्ता मुख्य ऋणधारक और रजनीश वार्ष्णेय सह-ऋणधारक थे। ग्राहक संख्या 44782469 दर्ज है।
लोन के बदले रामबाग कॉलोनी, मौजा क्वार्सी, तहसील कोल, अलीगढ़ स्थित संपत्ति संख्या 2/614 को गिरवी रखा गया था। शिकायत में संपत्ति का क्षेत्रफल 410 वर्ग गज यानी 342.8 वर्ग मीटर और खसरा संख्या 710 बताया गया है। बैंक के मुताबिक, 30 मई 2016 को CERSAI ट्रांजैक्शन आईडी 2000441XXXXX के जरिए संपत्ति पर उसका वैधानिक इक्विटेबल मॉर्गेज चार्ज दर्ज कराया गया था।
तीन साल बाद 65 लाख में बेच दिया संपत्ति का हिस्सा
बैंक की शिकायत के अनुसार, आंतरिक जांच में सामने आया कि ऋणधारकों ने बैंक की अनुमति, सहमति, अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) या सूचना के बिना गिरवी रखी संपत्ति का 213.20 वर्ग मीटर हिस्सा बेच दिया। यह सौदा 25 जुलाई 2019 को पवन तिवारी के पक्ष में 65 लाख रुपये में किया गया।
शिकायत में पवन तिवारी का पता प्रतिभा कॉलोनी फेज-2, कोल, अलीगढ़ बताया गया है। बैंक के अनुसार, बिक्री विलेख का पंजीकरण उपनिबंधक प्रथम, अलीगढ़ के कार्यालय में कराया गया था। इसका विवरण बही संख्या 1, जिल्द संख्या 14448, पृष्ठ संख्या 385 से 406 और दस्तावेज संख्या 6575 के रूप में दर्ज है।
बैंक ने जताई 1.03 करोड़ रुपये की वित्तीय क्षति
बैंक का आरोप है कि गिरवी रखी संपत्ति का हिस्सा बिना अनुमति बेचने से उसके ऋण की सुरक्षा प्रभावित हुई। शिकायत में इस पूरे प्रकरण से बैंक को 1,03,68,633 रुपये की वित्तीय क्षति होने का दावा किया गया है। बैंक ने इसे प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने का मामला बताते हुए नेहा गुप्ता और रजनीश वार्ष्णेय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
बैंक की ओर से शिकायत में संबंधित ऋण खाते, मॉर्गेज पंजीकरण और संपत्ति की रजिस्ट्री का विवरण दिया गया है। इन दस्तावेजों के आधार पर पुलिस के सामने यह जांचने का सवाल होगा कि बिक्री के समय संपत्ति पर बैंक का बंधक अधिकार किस स्थिति में था और सौदा किन परिस्थितियों में किया गया।
पुलिस जांच में स्पष्ट होगी भूमिका
मामले में बैंक ने ऋणधारक नेहा गुप्ता और सह-ऋणधारक रजनीश वार्ष्णेय को नामजद किया है। अब एसएसपी के निर्देश पर दर्ज हुए मुकदमे में पुलिस जांच में लोन दस्तावेजों, CERSAI रिकॉर्ड, रजिस्ट्री और बैंक की ओर से बताई गई वित्तीय क्षति की पड़ताल की जाएगी।
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