बलरामपुर में राप्ती 25 सेंटीमीटर ऊपर:प्रशासन अलर्ट, जलस्तर घटने की उम्मीद; 16 गांवों में जलभराव, 11 अतिरिक्त नावें मंगाई गईं

Sep 30, 2026 - 07:25
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बलरामपुर में राप्ती 25 सेंटीमीटर ऊपर:प्रशासन अलर्ट, जलस्तर घटने की उम्मीद; 16 गांवों में जलभराव, 11 अतिरिक्त नावें मंगाई गईं
बलरामपुर में लगातार हुई बारिश के बाद राप्ती नदी उफान पर है। मंगलवार शाम 5 बजे नदी का जलस्तर 104.870 मीटर दर्ज किया गया, जो 104.620 मीटर के खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर है। राप्ती बैराज से पानी का डिस्चार्ज घटने के बाद प्रशासन को जलस्तर कम होने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल नदी का स्तर स्थिर बना हुआ है। बाढ़ और जलभराव को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। तीनों तहसीलों के 16 गांवों में आवागमन प्रभावित है। जलभराव वाले गांवों में बड़ी नावें चल रही हैं और जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त नावें भी मंगाई जा रही हैं। 8 लोगों की मौत, 110 मकान क्षतिग्रस्त 24 से 26 सितंबर के बीच आंधी, बारिश और अतिवृष्टि से जिले में भारी नुकसान हुआ। इस दौरान आठ लोगों की मौत हुई। इनमें सदर तहसील के चार, तुलसीपुर के एक और उतरौला तहसील के तीन लोग शामिल हैं। मृतकों के परिजनों को अनुमन्य आपदा सहायता राशि दिलाने की प्रक्रिया चल रही है। अतिवृष्टि से जिले में 110 मकानों को नुकसान पहुंचा है। सदर तहसील में 10 पशुओं की हानि भी दर्ज की गई है। किसानों की फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें तीनों तहसीलों में सर्वे कर रही हैं। 2032 पोल और 138 ट्रांसफॉर्मर टूटे बारिश और तेज हवाओं से बिजली व्यवस्था को भी बड़ा नुकसान हुआ है। जिले में 2032 बिजली के पोल, 138 ट्रांसफॉर्मर और करीब 31 किलोमीटर विद्युत कंडक्टर क्षतिग्रस्त हुए हैं। बिजली विभाग की टीमें लगातार मरम्मत में जुटी हैं। अब तक 33 फीडर बहाल किए जा चुके हैं, जबकि 44 फीडरों पर काम जारी है। लोक निर्माण विभाग ने सड़कों पर गिरे 211 पेड़ों को हटाकर आवागमन शुरू करा दिया है। क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत का काम भी कराया जा रहा है। 16 गांवों में पानी, 21 नावें लगेंगी राप्ती नदी और नेपाली पहाड़ी नालों से आने वाले पानी के कारण तीनों तहसीलों के 16 गांवों में आवागमन प्रभावित है। बलरामपुर के 10, तुलसीपुर के चार और उतरौला के दो गांव जलभराव की चपेट में हैं। 10 गांवों में बड़ी नावें संचालित की जा रही हैं, जबकि जरूरत के आधार पर 11 अतिरिक्त नावें मंगाई जा रही हैं। जलभराव वाले इलाकों में लोगों की आवाजाही सुचारु रखने के लिए प्रशासन ने नावों की व्यवस्था की है। नेपाली पहाड़ी नालों से आने वाले पानी पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। राजस्व से लेकर पुलिस तक टीमें सक्रिय डीएम डॉ. विपिन कुमार जैन के निर्देशन में राजस्व, बाढ़, पुलिस, विद्युत, लोक निर्माण और कृषि विभाग की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि संवेदनशील इलाकों में जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। राप्ती बैराज से पानी का डिस्चार्ज कम होने के बाद बुधवार से जलस्तर घटने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन नदी का स्तर फिलहाल स्थिर है। प्रशासन की निगाह अब राप्ती के जलस्तर और नेपाली पहाड़ी नालों से आने वाले पानी पर टिकी है।

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