बलरामपुर में राप्ती खतरे के निशान से 1 सेमी ऊपर:पहाड़ी नाले उफने, दर्जनों गांवों के खेत-आबादी में घुसा पानी; संपर्क मार्ग भी डूबे

Sep 28, 2026 - 17:42
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बलरामपुर में राप्ती खतरे के निशान से 1 सेमी ऊपर:पहाड़ी नाले उफने, दर्जनों गांवों के खेत-आबादी में घुसा पानी; संपर्क मार्ग भी डूबे
बलरामपुर में राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तराई क्षेत्र में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। सोमवार दोपहर 1 बजे नदी का जलस्तर 104.620 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरे के निशान पर था। शाम तक यह बढ़कर 104.630 मीटर पहुंच गया। पहाड़ी नालों में तेज बहाव के कारण दर्जनों गांवों के खेतों और आबादी में पानी घुस गया है। कई जगह धान, सब्जी और गन्ने की फसलें जलमग्न हो गई हैं। बीते गुरुवार रात से शुरू हुई बारिश रविवार को थम गई, लेकिन इसका असर अभी भी नजर आ रहा है। पहाड़ी नाले उफान पर हैं। ककराहवा, हेगहा, जमधरा, कचनी फोहरी, गौरिया और धोबिनिया नालों में तेज धार बह रही है। नालों का पानी खेतों में फैलने से कई जगह फसलें डूब गई हैं। कई संपर्क मार्गों पर दो फीट तक पानी बाढ़ के पानी ने ग्रामीण संपर्क मार्गों को भी प्रभावित किया है। हरिहरगंज-ललिया मार्ग पर लौकाहवा डिप के पास करीब दो फीट पानी बह रहा है। प्राणपुर-सिटकिहवा मोड़ मार्ग पर अमहवा डिप और बजरडीह गांव के पास भी करीब दो फीट पानी तेज बहाव के साथ सड़क से गुजर रहा है। सिटकिहवा मोड़ से लालपुर चौराहा जाने वाले मार्ग पर कमदी गांव के पास भी करीब दो फीट पानी बह रहा है। इससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। चार गांवों की आबादी में घुसा नाले का पानी हेगहा पहाड़ी नाले का पानी मदारगढ़, कमदी, परसाहवा और इटैहिया गांवों में घुस गया है। वहीं ठडक्की, वनघुसरी, इटैहिया, चनियाकोट, किला, भुसैलिया, लखनीपुर, लौकाहवा, ओदरैहिया, नारायणपुर, पिट्ठा, प्रतापपुर और बुडतपुर के खेत भी बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं। धान, सब्जी और गन्ने की फसलें डूबीं खेतों में खड़ी धान, सब्जी और गन्ने की फसल पानी में डूब गई है। किसानों का कहना है कि पहाड़ी नालों का पानी हर साल खेती को नुकसान पहुंचाता है। इस बार भी जलस्तर बढ़ने से फसल बर्बाद होने की आशंका है। बाढ़ का पानी खेतों में फैलने से हरे चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। किसान जनमेजय सिंह, रामबहादुर सिंह, कन्हैया लाल, प्रेम नारायण, सोखा, राजेश कुमार और राकेश कुमार ने बताया कि खेत जलमग्न होने से दुधारू पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता प्रभावित हुई है। तीन साल से फसल नुकसान, मुआवजे की शिकायत किसानों का कहना है कि करीब तीन वर्षों से धान की फसल बाढ़ में डूबकर नष्ट हो रही है। उनका आरोप है कि सभी प्रभावित किसानों को फसल क्षतिपूर्ति का लाभ नहीं मिल पाता, जिससे उनमें निराशा है। उप जिलाधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और आवश्यक कार्रवाई के लिए राजस्व कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं।

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