बलरामपुर में सोहेलवा को टाइगर रिजर्व बनाने की प्रक्रिया तेज:केंद्रीय मंत्री बोले- जंगल के भीतर 15-16 बसावटों के पुनर्वास पर अध्ययन

Oct 03, 2026 - 13:14
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बलरामपुर में सोहेलवा को टाइगर रिजर्व बनाने की प्रक्रिया तेज:केंद्रीय मंत्री बोले- जंगल के भीतर 15-16 बसावटों के पुनर्वास पर अध्ययन
बलरामपुर तराई के जंगलों और वन्यजीवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण सोहेलवा वन्यजीव क्षेत्र को टाइगर रिजर्व बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने पहल तेज कर दी है।केंद्रीय पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि सोहेलवा सिर्फ बाघों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण नहीं है,बल्कि यह देश के बड़े वन्यजीव कॉरिडोर की एक बेहद अहम कड़ी है। इसे टाइगर रिजर्व बनाने की दिशा में अध्ययन और जरूरी प्रक्रियाओं पर काम चल रहा है। मंत्री ने बताया कि पश्चिम में कॉर्बेट,दुधवा और कुमाऊं से शुरू होकर पूर्वोत्तर में असम तक जाने वाले वन्यजीव गलियारे में सोहेलवा की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। सुरक्षित रखने में सोहेलवा की भूमिका अहम इस पूरे कॉरिडोर में कई स्थानों पर वन क्षेत्र की निरंतरता टूट गई है और सोहेलवा के हिस्से में महज करीब एक किलोमीटर से थोड़ा अधिक चौड़ा बेहद संकरा वन क्षेत्र बचा है।ऐसे में वन्यजीवों की आवाजाही और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में सोहेलवा की भूमिका अहम हो जाती है। कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि टाइगर रिजर्व बनाने का उद्देश्य केवल बाघों की संख्या बढ़ाना नहीं है।बाघ जंगल की खाद्य शृंखला में शीर्ष शिकारी यानी एपेक्स प्रेडेटर है।बाघ के अस्तित्व के लिए उससे नीचे की पूरी खाद्य शृंखला का सुरक्षित रहना जरूरी है। पूरी जैव विविधता सुरक्षित उन्होंने कहा कि घास के मैदान से लेकर पेड़-पौधों,कीट-पतंगों,छोटे जीवों और दूसरे वन्यजीवों तक पूरी जैव विविधता सुरक्षित होगी, तभी बाघ भी सुरक्षित रहेंगे।फूड चेन पूरी तरह सुरक्षित होगी,तभी टाइगर बचेगा। मंत्री के मुताबिक सोहेलवा को टाइगर रिजर्व बनाने की प्रक्रिया में जंगल के भीतर मौजूद करीब 15-16 बसावटों का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। इन बस्तियों को किस तरह भूमि उपलब्ध कराकर दूसरे स्थान पर बसाया जा सकता है,इस पर अध्ययन चल रहा है। पुनर्वास की संभावनाओं और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सरकार काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सोहेलवा के संरक्षण का मुद्दा उनके लिए नया नहीं है। सांसद बनने के बाद जब भी उन्हें अवसर मिला,उन्होंने संसद की वन एवं पर्यावरण संबंधी स्थायी समिति की सदस्यता को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार पिछले करीब 10-12 वर्षों से सोहेलवा वन्यजीव कॉरिडोर के संरक्षण और अब इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा दिलाने की दिशा में उनकी ओर से प्रयास जारी हैं। पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित करना उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के बड़े शिकारी जीवों—टाइगर, लायन और लेपर्ड आदि—के संरक्षण का मकसद केवल इन प्रजातियों को बचाना नहीं, बल्कि उनके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित करना है। टाइगर रिजर्व का दर्जा देने की दिशा सोहेलवा को टाइगर रिजर्व बनाने की पहल इसी व्यापक संरक्षण नीति की स्थानीय कड़ी के रूप में देखी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अध्ययन, वन क्षेत्र के भीतर की बसावटों के पुनर्वास और अन्य प्रक्रियाओं के बाद सोहेलवा को टाइगर रिजर्व का दर्जा देने की दिशा में अगला कदम कब उठता है।

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