सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन शुरू होते ही ठप हुआ पोर्टल, लाखों छात्रों की बढ़ी परेशानी

सीबीएसई द्वारा पुनर्मूल्यांकन और उत्तरपुस्तिका सत्यापन प्रक्रिया शुरू किए जाने के साथ ही पोर्टल तकनीकी समस्या का शिकार हो गया। चार लाख से अधिक छात्रों ने उत्तरपुस्तिकाओं की प्रतियां मांगी हैं, जबकि वेबसाइट बंद होने से आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हुई है। छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता की मांग तेज कर दी है।

सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन शुरू होते ही ठप हुआ पोर्टल, लाखों छात्रों की बढ़ी परेशानी

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 1 जून 2026

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कक्षा के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद पुनर्मूल्यांकन और उत्तरपुस्तिका सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होते ही तकनीकी समस्याओं ने छात्रों की परेशानी बढ़ा दी है। देशभर के लाखों छात्र जैसे ही आवेदन करने के लिए बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर पहुंचे, पोर्टल उपलब्ध नहीं मिला। वेबसाइट पर रखरखाव कार्य का संदेश दिखाई देने लगा, जिससे पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है।

रिकॉर्ड संख्या में छात्रों ने मांगी उत्तरपुस्तिकाएं

इस वर्ष परीक्षा परिणामों को लेकर बड़ी संख्या में छात्रों ने अपने प्राप्तांकों पर सवाल उठाए हैं। बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार चार लाख से अधिक विद्यार्थियों ने अपनी मूल्यांकित उत्तरपुस्तिकाओं की प्रतियां प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है। इन विद्यार्थियों द्वारा ग्यारह लाख से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं की मांग दर्ज कराई गई है। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक मानी जा रही है, जिससे छात्रों के बीच मूल्यांकन को लेकर बढ़ती चिंताओं का पता चलता है।

पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू होते ही तकनीकी संकट

बोर्ड ने एक जून से उत्तरपुस्तिका सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया प्रारंभ करने की घोषणा की थी। हजारों छात्र निर्धारित समय पर आवेदन करने के लिए पोर्टल पर पहुंचे, लेकिन वेबसाइट खुल नहीं सकी। छात्रों को लगातार यह संदेश दिखाई देता रहा कि वेबसाइट पर रखरखाव का कार्य चल रहा है और सेवा शीघ्र बहाल की जाएगी। इस स्थिति ने उन विद्यार्थियों की चिंता बढ़ा दी जो निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करना चाहते हैं।

डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर उठ रहे सवाल

इस वर्ष बोर्ड ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए डिजिटल अंकन प्रणाली का उपयोग किया था। इस व्यवस्था में उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन कर परीक्षकों के सामने डिजिटल रूप में प्रस्तुत किया जाता है। बोर्ड का दावा है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनी है। हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद अनेक छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपेक्षा से कम अंक प्राप्त हुए हैं तथा कुछ उत्तरों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया।

छात्रों ने जताई अंकन में त्रुटियों की आशंका

कई विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी उत्तरपुस्तिकाओं में कुछ उत्तरों को अंक नहीं दिए गए या फिर मूल्यांकन के दौरान त्रुटियां हुई हैं। सामाजिक माध्यमों पर भी बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आई हैं। छात्रों ने उत्तरपुस्तिकाओं की प्रतियां प्राप्त कर उनकी जांच करने की मांग तेज कर दी है। यही कारण है कि इस बार पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए आवेदन करने वालों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

शुल्क में कमी कर दी गई राहत

छात्रों और अभिभावकों की मांग को देखते हुए बोर्ड ने परीक्षा उपरांत सेवाओं के शुल्क में भी बदलाव किया है। अब विद्यार्थी प्रति विषय मात्र सौ रुपये देकर अपनी स्कैन की गई उत्तरपुस्तिका प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार अंकों के सत्यापन के लिए भी सौ रुपये प्रति विषय शुल्क निर्धारित किया गया है। बोर्ड का कहना है कि शुल्क में कमी का उद्देश्य विद्यार्थियों को अधिक सुविधा प्रदान करना और प्रक्रिया को सुलभ बनाना है।

कौन कर सकता है पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन

वे विद्यार्थी जो अपने प्राप्तांकों से संतुष्ट नहीं हैं, सबसे पहले अपनी उत्तरपुस्तिका की प्रति प्राप्त कर सकते हैं। इसके बाद वे उत्तरों के मूल्यांकन और अंकों के जोड़ की सावधानीपूर्वक जांच कर सकते हैं। यदि किसी प्रश्न का मूल्यांकन नहीं हुआ है या अंक देने में त्रुटि दिखाई देती है, तो छात्र सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद अंक बढ़ भी सकते हैं, घट भी सकते हैं अथवा यथावत रह सकते हैं।

पारदर्शिता को लेकर जारी है बहस

डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर शिक्षा जगत में लगातार बहस जारी है। छात्र संगठन, अभिभावक और शिक्षा विशेषज्ञ मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से प्रक्रिया तेज हो सकती है, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक कमियों को दूर किए बिना छात्रों का विश्वास पूरी तरह नहीं जीता जा सकता। मौजूदा स्थिति ने मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

लाखों छात्रों की निगाहें बोर्ड पर

पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अब लाखों छात्रों की निगाहें बोर्ड की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। विद्यार्थी चाहते हैं कि पोर्टल को जल्द से जल्द सुचारु किया जाए ताकि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन कर सकें। साथ ही मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित कर छात्रों की शंकाओं का समाधान किया जाए। आने वाले दिनों में बोर्ड का रुख इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।