बी ब्लड ग्रुप वालों में बढ़ सकता है डायबिटीज का खतरा

एक नई वैज्ञानिक स्टडी में दावा किया गया है कि बी ब्लड ग्रुप वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा अन्य ब्लड ग्रुप्स की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत अधिक हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ब्लड ग्रुप के आधार पर बीमारी का निर्धारण नहीं किया जा सकता और जीवनशैली अब भी सबसे महत्वपूर्ण कारक है।

बी ब्लड ग्रुप वालों में बढ़ सकता है डायबिटीज का खतरा

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 24 जून 2026

नई स्टडी में सामने आया संभावित संबंध

डायबिटीज को लेकर आमतौर पर खराब खानपान, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और पारिवारिक इतिहास जैसे कारणों की चर्चा होती है। लेकिन एक नई स्टडी में ब्लड ग्रुप और टाइप-2 डायबिटीज के बीच संभावित संबंध का दावा किया गया है।शोधकर्ताओं के अनुसार बी ब्लड ग्रुप वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा अन्य ब्लड ग्रुप वाले लोगों की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत अधिक पाया गया है। यह निष्कर्ष कई पूर्व अध्ययनों के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद सामने आया है।

हजारों लोगों के आंकड़ों का किया गया विश्लेषण

इस अध्ययन में पहले से प्रकाशित 51 अलग-अलग शोधों के आंकड़ों की समीक्षा की गई। शोधकर्ताओं ने कुल 6,870 लोगों से जुड़े स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया और विभिन्न ब्लड ग्रुप्स तथा डायबिटीज के जोखिम के बीच संबंधों की तुलना की।अध्ययन में पाया गया कि बी ब्लड ग्रुप और टाइप-2 डायबिटीज के बीच सबसे मजबूत संबंध देखने को मिला। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल जोखिम में वृद्धि का संकेत है, न कि बीमारी होने की निश्चित भविष्यवाणी।

क्या बी ब्लड ग्रुप वालों को घबराने की जरूरत है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बी ब्लड ग्रुप होना चिंता का कारण नहीं है। टाइप-2 डायबिटीज के पीछे कई अन्य महत्वपूर्ण कारक भी जिम्मेदार होते हैं।अधिक वजन, असंतुलित आहार, नियमित व्यायाम की कमी, तनाव और परिवार में मधुमेह का इतिहास आज भी इस बीमारी के प्रमुख कारण माने जाते हैं। ऐसे में ब्लड ग्रुप को केवल एक संभावित जोखिम संकेतक के रूप में देखा जाना चाहिए।

वैज्ञानिक अभी तलाश रहे हैं वजह

शोधकर्ताओं के अनुसार अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बी ब्लड ग्रुप वाले लोगों में यह जोखिम अधिक क्यों दिखाई देता है।कुछ हालिया अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि आंतों में मौजूद सूक्ष्म जीवों का समूह, जिसे गट माइक्रोबायोम कहा जाता है, इस संबंध में भूमिका निभा सकता है। हालांकि इस विषय पर अभी और गहन शोध की आवश्यकता है।

जीवनशैली में बदलाव से कम हो सकता है जोखिम

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड ग्रुप को बदला नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी आदतें मधुमेह की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

शोध को लेकर बरतें सावधानी

वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल एक संभावित संबंध की ओर संकेत करता है। किसी व्यक्ति को डायबिटीज होगी या नहीं, इसका निर्णय केवल उसके ब्लड ग्रुप के आधार पर नहीं किया जा सकता।शोधकर्ता भविष्य में इस विषय पर और अध्ययन करने की योजना बना रहे हैं ताकि ब्लड ग्रुप और डायबिटीज के बीच मौजूद संभावित जैविक संबंधों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।