चित्रकूट में 25-27 अक्टूबर तक शरदोत्सव:बाढ़ के कारण टला था आयोजन, लोकनृत्य और गायिकी पर रहेगा फोकस
चित्रकूट में राष्ट्रऋषि भारतरत्न नानाजी देशमुख के जन्मदिवस शरद पूर्णिमा पर आयोजित होने वाला सांस्कृतिक समारोह शरदोत्सव इस बार 25 से 27 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। चित्रकूट में आई भीषण बाढ़ के चलते आयोजक मंडल ने पहले कार्यक्रम टालने का निर्णय लिया था। हालांकि, संत समाज और नगरवासियों के आग्रह पर अब पूर्व की तरह तीन दिवसीय आयोजन कराने पर सहमति बन गई है। कार्यक्रम दीनदयाल परिसर में होगा। इसमें पारंपरिक नृत्य और गायिकी पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। बैठक में तीन दिवसीय आयोजन पर सहमति शरदोत्सव की तैयारियों को लेकर उद्यमिता विद्यापीठ स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में संत समाज, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और नगर के गणमान्य नागरिकों की बैठक हुई। इसमें कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा की गई। उपस्थित लोगों ने कहा कि शरदोत्सव चित्रकूट की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। ऐसे में इसे पूर्व की तरह आयोजित किया जाना चाहिए। सभी की सहमति के बाद 25 से 27 अक्टूबर तक कार्यक्रम कराने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय स्तर पर बनी शरदोत्सव की पहचान दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि नानाजी देशमुख का जीवन सार्वजनिक सेवा और जनकल्याण के लिए समर्पित रहा। उनके जन्मदिवस पर होने वाले शरदोत्सव ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। संस्कृति संचालनालय मध्यप्रदेश और जिला प्रशासन के सहयोग से हर साल इस आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं। पहले एक दिन आयोजन का था विचार अभय महाजन ने बताया कि बाढ़ से पैदा हुए हालात को देखते हुए इस वर्ष आयोजन को सामान्य रूप से एक दिन तक सीमित रखने का विचार था। हालांकि, संत समाज और नगरवासियों के सुझावों के बाद तीन दिवसीय कार्यक्रम कराने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि आगे भी आयोजन की रूपरेखा तैयार करने में संत समाज और गणमान्य नागरिकों के सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी। संत समाज और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद बैठक में महंत सीताशरण दास, महंत दिव्यजीवन दास, महंत माधव दास, डॉ. रामनारायण त्रिपाठी, ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. आलोक चौबे, पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, नगर पंचायत अध्यक्ष साधना पटेल, एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर और तहसीलदार कमलेश भदौरिया समेत विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक क्षेत्रों से जुड़े लोग मौजूद रहे।
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