सीजेपी का 5 सितंबर मार्च रद्द, प्राथमिकी पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा फैसला
सीजेपी आंदोलन से जुड़े मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने 13 प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया. सरकार ने गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ नए मामले दर्ज करने की बात कही. मुआवजे की प्रक्रिया तैयार करने के लिए सरकार ने तीन महीने का समय मांगा. वहीं सीजेपी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने की घोषणा कर दी.
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दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 01 सितंबर 2026
सितंबर 2026 में सीजेपी आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. केंद्र सरकार ने आंदोलन से जुड़ी 13 प्राथमिकी रद्द करने के लिए अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्ति का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया. साथ ही गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ अलग से कार्रवाई की बात कही गई. सुनवाई के बाद सीजेपी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने की घोषणा कर दी.
सुप्रीम कोर्ट में सीजेपी आंदोलन से जुड़े मामलों पर सुनवाई
जंतर-मंतर पर हुए छात्र और प्रदर्शनकारी आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई. केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. इनमें मुकदमे वापस लेने और प्रभावित छात्रों के लिए सहायता देने जैसी बातें शामिल हैं.सुनवाई के दौरान केंद्र ने अदालत से अनुरोध किया कि दिल्ली में दर्ज 13 प्राथमिकी को रद्द करने की अनुमति दी जाए. सरकार ने बताया कि दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल की ओर से भी इसी तरह के आवेदन दाखिल किए गए हैं. केंद्र ने कहा कि अन्य राज्यों में दर्ज मामलों को लेकर भी आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं. सरकार ने अदालत से अपनी विशेष संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करने का आग्रह किया.
गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर होगी अलग कार्रवाई
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को एक समान तरीके से नहीं देखा जाएगा. सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि भीड़ में शामिल गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ नए मामले दर्ज किए जाएंगे. सरकार का कहना है कि जिन लोगों पर गंभीर अपराधों में शामिल होने के तथ्य सामने आएंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी.वहीं, जिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आंदोलन से संबंधित प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, उनमें से कई मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. केंद्र ने कहा कि वह इस मामले को लेकर विभिन्न पक्षों से बातचीत कर रहा है. सरकार ने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि मामले को अनावश्यक रूप से जटिल न बनाया जाए. अंतिम निर्णय अदालत के आदेश और संबंधित राज्यों की कार्रवाई के आधार पर होगा.
सीजेपी ने 5 सितंबर का मार्च लिया वापस
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने आंदोलन को लेकर बड़ा ऐलान किया. उन्होंने अदालत को बताया कि संगठन 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च का आह्वान वापस ले रहा है. उन्होंने इसके लिए अदालत और मामले में पक्ष रखने वाले सभी वकीलों का आभार जताया.सीजेपी की ओर से पहले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने और भविष्य में ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं करने की मांग रखी गई थी. संगठन की ओर से नीट से जुड़े प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी की गई है. सुनवाई के दौरान इन मांगों को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के वकीलों के बीच चर्चा हुई. अब संगठन की अगली रणनीति अदालत के आदेश और सरकार की कार्रवाई पर निर्भर करेगी.
मुआवजे को लेकर सरकार ने क्या कहा
मुआवजे के मुद्दे पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार फिलहाल अदालत से इस संबंध में कोई आदेश नहीं चाहती. उन्होंने कहा कि यदि अदालत की ओर से कोई आदेश दिया जाता है तो वह भविष्य में होने वाली अन्य परीक्षाओं के मामलों के लिए उदाहरण बन सकता है. सरकार ने छात्रों से किए गए अपने वादे को रिकॉर्ड पर लेने और उसे पूरा करने के लिए तीन महीने का समय देने का अनुरोध किया.सरकार की ओर से कहा गया कि मुआवजे से संबंधित व्यवस्था तैयार करने पर काम चल रहा है. इसके लिए एक उचित तरीका और प्रक्रिया तय की जाएगी. वरिष्ठ वकील हरिहरन ने प्रभावित छात्रों की पहचान करने और मुआवजे की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक अलग पोर्टल बनाने का सुझाव दिया. सरकार ने कहा कि वह सभी पक्षों से बातचीत कर रही है और मामले को व्यापक तरीके से सुलझाने की कोशिश की जा रही है.
प्रदर्शनकारियों की पहचान को लेकर भी हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील हरिहरन ने उन प्राथमिकी की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की जिन्हें रद्द किया जाना प्रस्तावित है. इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल किया कि जिन प्राथमिकी को समाप्त किया जा रहा है, उनकी प्रतियां क्यों आवश्यक हैं. वकील ने कहा कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल उच्चस्तरीय समिति के सामने अपना पक्ष रखने के लिए किया जा सकता है.इसके बाद वकील की ओर से उन करीब 2,873 लोगों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की गई, जिनके खिलाफ नए मामले दर्ज किए जाने की बात कही जा रही है. सरकार की ओर से इस मांग पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि मामले को लगातार आगे बढ़ाने या गर्म रखने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए. अदालत में दोनों पक्षों के बीच प्रदर्शनकारियों की पहचान और आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा हुई.
वकील वृंदा ग्रोवर ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने प्रदर्शनकारियों की स्थिति को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि कम से कम यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित लोग घटनास्थल पर मौजूद थे या नहीं. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि केवल किसी स्थान पर मौजूद होने के आधार पर किसी व्यक्ति को अपराध में शामिल मानना उचित नहीं होगा.इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि फिलहाल यह मानकर चला जा सकता है कि कुछ लोग उपद्रव और हिंसा में शामिल थे. उन्होंने कहा कि आगे की जांच के दौरान वास्तविक तथ्य सामने आएंगे. इससे स्पष्ट है कि सरकार सभी प्रदर्शनकारियों को एक ही श्रेणी में रखने के बजाय गंभीर आरोपों वाले लोगों के खिलाफ अलग कार्रवाई करना चाहती है.
अलग-अलग राज्यों ने भी दाखिल किए आवेदन
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल की ओर से भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने से संबंधित आवेदन दाखिल किए गए हैं. सरकार के अनुसार कुछ अन्य राज्यों में भी ऐसे मामले दर्ज हो सकते हैं. ऐसे मामलों की जानकारी मिलने के बाद उनके संबंध में भी उचित कार्रवाई की जा सकती है.केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि यदि ऐसे मामले अन्य राज्यों में भी सामने आते हैं तो अदालत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल कर उन्हें भी समाप्त करने पर विचार करे. सरकार का कहना है कि प्रदर्शनकारियों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. हालांकि गंभीर आपराधिक मामलों में कार्रवाई जारी रखने की बात भी साफ कर दी गई है.
सीजेपी की दो प्रमुख मांगें क्या हैं
सीजेपी की ओर से कहा गया कि आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को वापस लेना उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है. संगठन यह भी चाहता है कि भविष्य में इसी आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नए मामले दर्ज न किए जाएं. इसके अलावा नीट से जुड़े प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई है.संगठन की ओर से कहा गया कि अदालत में चल रही प्रक्रिया पर उसकी नजर बनी हुई है. सीजेपी का कहना है कि सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों को देखने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा. फिलहाल 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को वापस लेने की घोषणा कर दी गई है. इससे आंदोलन की आगे की दिशा में बदलाव की संभावना है.
अब आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद अब सरकार की ओर से प्राथमिकी वापस लेने की प्रक्रिया और मुआवजे से जुड़े कदमों पर नजर रहेगी. अदालत के सामने विभिन्न राज्यों से आए आवेदनों पर भी विचार किया जाना है. वहीं गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सरकार की घोषणा के बाद जांच प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी.प्रदर्शनकारियों और उनके वकीलों की ओर से मुआवजे तथा मामलों की जानकारी उपलब्ध कराने जैसी मांगें भी उठाई गई हैं. सरकार ने मुआवजे से जुड़े समाधान के लिए समय मांगा है. ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत के निर्देश और सरकार की अगली कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी.
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