सीजेपी ने 5 सितंबर का मार्च लिया वापस, सुप्रीम कोर्ट में कही बड़ी बात

कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस ले लिया है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने सुप्रीम कोर्ट में इसकी घोषणा की। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने छात्रों से किए वादे पूरे करने की बात कही और 13 प्राथमिकी खत्म करने का अनुरोध किया। मुआवजे के मुद्दे पर केंद्र ने तीन महीने का समय मांगा है।

Sep 01, 2026 - 15:16
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सीजेपी ने 5 सितंबर का मार्च लिया वापस, सुप्रीम कोर्ट में कही बड़ी बात

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 01 सितंबर 2026

कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इसकी जानकारी दी। वहीं केंद्र सरकार ने छात्रों से किए गए वादों को पूरा करने और प्रदर्शन से जुड़े 13 मुकदमे वापस लेने की बात कही है।

छात्रों पर दर्ज मुकदमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, केंद्र ने वादे पूरे करने की कही बात

कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च को वापस लेने का फैसला किया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इसकी जानकारी दी। यह मार्च इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक निकाला जाना प्रस्तावित था। मार्च वापस लेने का फैसला छात्रों से जुड़े मामलों और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर हुई सुनवाई के दौरान सामने आया।सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को खत्म करने की मांग पर सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार छात्रों से किए गए वादों को पूरा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस मामले को अनावश्यक रूप से जटिल नहीं बनाया जाना चाहिए। सरकार ने मुकदमे वापस लेने और अन्य मांगों पर भी कदम उठाने की बात कही।

केंद्र सरकार ने छात्रों से किए वादे पूरे करने की कही बात

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि केंद्र सरकार ने छात्रों से कुछ महत्वपूर्ण वादे किए थे। इनमें प्रदर्शन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और भविष्य में ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं करने की बात शामिल है। इसके अलावा आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का मुद्दा भी सरकार के सामने है। केंद्र ने कहा कि वह छात्रों से किए गए इन वादों को पूरा करना चाहती है।सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि इन मामलों को लेकर आगे की प्रक्रिया तय करने के लिए समय की जरूरत है। मुआवजे के संबंध में केंद्र ने फिलहाल कोई आदेश जारी नहीं करने का अनुरोध किया। सरकार ने अदालत से अपने वादे को अभिलेख में दर्ज करने और इसके लिए तीन महीने का समय देने की मांग की है।

13 प्राथमिकी खत्म करने का केंद्र ने किया अनुरोध

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण बात रखी गई। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि भीड़ में शामिल गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ नई प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। हालांकि, पहले से दर्ज 13 प्राथमिकी को खत्म करने के लिए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है।उन्होंने बताया कि दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल की ओर से भी इसी तरह के आवेदन दाखिल किए गए हैं। केंद्र ने कहा कि संभव है कि कुछ अन्य राज्यों में भी प्रदर्शन से जुड़े मामले दर्ज हों। ऐसे मामलों को भी खत्म करने या बंद मानने का आदेश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट से विशेष अधिकार के इस्तेमाल का अनुरोध किया गया है।

20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज हुए थे मामले

केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदर्शन से जुड़े ये मामले 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज किए गए थे। सरकार का कहना है कि जिन मामलों में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग शामिल नहीं हैं, उन्हें खत्म करने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। इससे प्रदर्शन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों को राहत मिलने की संभावना है।इस मामले में अलग-अलग राज्यों से सामने आ रहे आवेदनों को भी अदालत के सामने रखा गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन मामलों की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। अदालत में सुनवाई के दौरान छात्रों से किए गए सरकारी वादों और मुकदमों को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।

मुआवजे के मुद्दे पर केंद्र ने मांगा तीन महीने का समय

आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर भी अदालत में चर्चा हुई। केंद्र सरकार ने कहा कि वह इस संबंध में अभी कोई न्यायिक आदेश नहीं चाहती। सरकार का तर्क है कि अदालत का आदेश भविष्य में होने वाली हर तरह की परीक्षाओं और इसी तरह के मामलों के लिए उदाहरण बन सकता है।केंद्र ने कहा कि छात्रों से किए गए वादे को अदालत अपने अभिलेख में दर्ज करे और सरकार को तीन महीने का समय दिया जाए। इस अवधि में मुआवजे से जुड़ी व्यवस्था और उसके लिए आवश्यक प्रक्रिया तैयार की जाएगी। सरकार के मुताबिक इस विषय पर काम पहले से चल रहा है।

सीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट में मार्च वापस लेने का किया ऐलान

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने पार्टी की ओर से 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने की घोषणा की। उन्होंने अदालत और सभी वकीलों का धन्यवाद किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च का आह्वान वापस लिया जा रहा है।यह मार्च दिल्ली में इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक निकाला जाना था। मार्च के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पहले ही बढ़ा दी गई थी। अब मार्च वापस लिए जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी आगे के निर्णय लिए जा सकते हैं।

दिल्ली में बढ़ाई गई थी सुरक्षा व्यवस्था

5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी थी। एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती किए जाने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस की ओर से भीड़ और संभावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई थी।अब सीजेपी की ओर से मार्च वापस लेने की घोषणा के बाद इस व्यवस्था में बदलाव की संभावना है। हालांकि, प्रदर्शन से जुड़े मुकदमों और छात्रों की मांगों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आगे जारी रहेगी। अदालत के अगले आदेश के बाद प्राथमिकी और मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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