80 डॉलर से नीचे तेल फिर भी राहत नहीं

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंचने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल कटौती की संभावना नहीं है। केंद्र सरकार का कहना है कि सस्ता कच्चा तेल भारत पहुंचने, उसकी रिफाइनिंग और वितरण में समय लगता है, इसलिए उपभोक्ताओं को अभी इंतजार करना पड़ सकता है।

80 डॉलर से नीचे तेल फिर भी राहत नहीं

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 20 जून 2026

कच्चे तेल में गिरावट के बावजूद नहीं मिलेगी तत्काल राहत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल कमी की संभावना नहीं दिखाई दे रही है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक कीमतों में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लगेगा।

मंत्री ने बताया क्यों नहीं घट रहे दाम

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने के बाद भी ईंधन के दाम तुरंत नहीं घटाए जा सकते। उनके अनुसार सस्ता कच्चा तेल खरीदने, उसे भारत तक लाने, रिफाइन करने और फिर बाजार तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में समय लगता है।मंत्री ने बताया कि हाल में पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के कारण तेल की कीमतों में नरमी आई है, लेकिन इसका असर खुदरा ईंधन कीमतों पर धीरे-धीरे दिखाई देगा।

युद्ध और होर्मुज संकट से बढ़ी थीं कीमतें

ईरान-अमेरिका संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई अनिश्चितता के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। उस समय वैश्विक बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण तेल महंगा हो गया था, जिसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ा।अब हालात सामान्य होने के संकेत मिल रहे हैं और तेल की कीमतें काफी नीचे आ चुकी हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि कीमतों में कमी का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचने में समय लगेगा।

सरकार पर पड़ा हजारों करोड़ का बोझ

सुरेश गोपी ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव पड़ा था। केंद्र सरकार ने इस दबाव का एक हिस्सा स्वयं वहन किया, जिससे सरकारी खजाने पर लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा।उन्होंने यह भी कहा कि किसी राज्य सरकार ने बढ़ी हुई ईंधन कीमतों के दौरान अपने करों में कटौती नहीं की। ऐसे में केंद्र सरकार और तेल कंपनियों दोनों को वित्तीय संतुलन बनाए रखना पड़ रहा है।

केवल 3.94 रुपये प्रति लीटर का सीधा प्रभाव

मंत्री के अनुसार हालिया मूल्य वृद्धि का सीधा प्रभाव लगभग 3.94 रुपये प्रति लीटर रहा है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बावजूद इस वृद्धि को तुरंत वापस लेना संभव नहीं है, क्योंकि तेल कंपनियों को पहले से हुए नुकसान और लागत का भी ध्यान रखना पड़ता है।

वैश्विक बाजार को लेकर अलग-अलग अनुमान

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और ब्रोकरेज फर्मों के बीच तेल बाजार के भविष्य को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।गोल्डमैन सैक्स ने अपने अनुमान में कटौती करते हुए कहा है कि फारस की खाड़ी से तेल आपूर्ति अपेक्षा से जल्दी सामान्य हो सकती है। इसी कारण संस्था ने 2026 की चौथी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड का अनुमान 90 डॉलर से घटाकर 80 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।साथ ही 2027 के औसत मूल्य अनुमान को भी 80 डॉलर से घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।

आपूर्ति बाधाओं की आशंका बरकरार

दूसरी ओर एमके ग्लोबल का मानना है कि बाजार अभी भी संभावित जोखिमों को कम आंक रहा है। संस्था के अनुसार लॉजिस्टिक बाधाएं, बढ़ी हुई बीमा लागत, टैंकरों की उपलब्धता और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।ब्रोकरेज फर्म ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में कई सप्ताह या कुछ मामलों में महीनों का समय लग सकता है।

फिर बढ़ सकते हैं तेल के दाम

एमके ग्लोबल का अनुमान है कि आने वाले सप्ताहों में कच्चे तेल की कीमतें दोबारा 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर पहुंच सकती हैं। संस्था का कहना है कि वैश्विक भंडार में कमी, चीन की बढ़ती मांग और कई देशों द्वारा रणनीतिक तेल भंडार दोबारा भरने की प्रक्रिया बाजार पर दबाव बना सकती है।

भारत को हो सकता है बड़ा फायदा

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार यदि संघर्ष से जुड़ा 10 से 15 डॉलर प्रति बैरल का अतिरिक्त प्रीमियम पूरी तरह समाप्त हो जाता है, तो भारत के कच्चे तेल आयात बिल में हर महीने 1.5 से 1.8 अरब डॉलर तक की कमी आ सकती है।कम तेल कीमतों का लाभ रिफाइनरी कंपनियों, शहरी गैस वितरण कंपनियों और एलएनजी अवसंरचना क्षेत्र को भी मिल सकता है। वहीं ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी कंपनियों के लाभ में बने रहने की संभावना जताई गई है।

फिलहाल इंतजार करना होगा

विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों की राय को देखते हुए फिलहाल यह स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम है। हालांकि यदि वैश्विक बाजार में स्थिरता बनी रहती है और तेल कीमतें लंबे समय तक नीचे रहती हैं, तो आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।