डायबिटीज छिपाने से बेटियों की बढ़ रही मुश्किलें:शादी में परेशानी के डर से इलाज टाल रहे माता-पिता, विशेषज्ञों ने किया अलर्ट
बेढंगी जीवनशैली और खानपान की वजह से डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है। हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। बीमारी के शुरुआती लक्षण नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। वहीं, समाज में बदनामी और शादी में परेशानी के डर से कई परिवार बेटियों की डायबिटीज छिपा रहे हैं। इससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता और ब्लड शुगर बेकाबू होने का खतरा बढ़ जाता है। यह बात शुक्रवार को लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने कही। वह उत्तर प्रदेश डायबिटीज एसोसिएशन की ओर से लोहिया संस्थान के प्रेक्षागृह में आयोजित यूपीडाकॉन-2026 कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। समय पर पहचान और इलाज जरूरी डॉ.सीएम सिंह ने कहा कि डायबिटीज के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि लोग समय पर इलाज करा सकें। बीमारी की पहचान, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं या इंसुलिन का इस्तेमाल और जीवनशैली में सुधार से ब्लड शुगर को कंट्रोल रखा जा सकता है। नियमित जांच, संतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करके मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। इलाज में देरी से दूसरे अंगों पर असर लोहिया संस्थान के कुलसचिव डॉ. सुब्रत चन्द्रा ने कहा कि डायबिटीज की समय पर पहचान और सही इलाज से बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है। इलाज में देरी घातक हो सकती है। उन्होंने जीवनशैली में सुधार पर भी जोर दिया। डीन डॉ.राजन भटनागर ने कहा कि दवाओं के साथ खानपान और नियमित कसरत पर ध्यान देना जरूरी है। वहीं, KGMU के फिजियोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नरसिंह वर्मा ने कहा कि डायबिटीज के इलाज में शर्म और झिझक की कोई जगह नहीं है। देरी से इलाज कराने पर बीमारी दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। शादी में परेशानी के डर से छिपा रहे बीमारी उत्तर प्रदेश डायबिटीज एसोसिएशन के डॉ.अजय तिवारी ने कहा कि समाज में बदनामी और शादी में परेशानी के डर से कई माता-पिता बेटियों की डायबिटीज छिपाते हैं। दूसरों को बीमारी का पता न चले, इस वजह से वे इलाज कराने से भी बचते हैं। इसका नुकसान बेटियों को उठाना पड़ता है। समय पर इलाज न मिलने से ब्लड शुगर बेकाबू हो सकती है और दूसरी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
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