एक बीघा में सोयाबीन की 1 से डेढ़ बोरी उपज, मंडियों में 4799 से 5940 रुपए क्विंटल तक भाव

Oct 08, 2026 - 05:49
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एक बीघा में सोयाबीन की 1 से डेढ़ बोरी उपज, मंडियों में 4799 से 5940 रुपए क्विंटल तक भाव
क्षेत्र में खरीफ की प्रमुख फसल सोयाबीन और उड़द की कटाई का काम शुरू हो गया है। इस बार फसल की उपज अपेक्षाकृत कम रहने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों के अनुसार एक बीघा में सोयाबीन की महज एक से डेढ़ बोरी यानी करीब एक से डेढ़ क्विंटल तक उपज निकल रही है, जबकि पिछले वर्षों में इसी रकबे में चार से साढ़े चार बोरी तक पैदावार हो जाती थी। किसानों का कहना है कि इस बार बारिश फसल की जरूरत के अनुरूप हुई, इसके बावजूद सोयाबीन की पैदावार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। क्षेत्र में करीब 30 प्रतिशत किसानों ने सोयाबीन की कटाई शुरू कर दी है। वर्तमान में मंडियों में सोयाबीन के भाव करीब 4799 से 5940 रुपए प्रति क्विंटल चल रहे हैं। किसानों को आशंका है कि मंडियों में आवक बढ़ने और भंडारण बढ़ने के साथ भाव में गिरावट आ सकती है। किसानों के अनुसार पैदावार प्रभावित होने के पीछे कई कारण हैं। किसानों का कहना है कि रासायनिक खरपतवारनाशी और कीटनाशकों के अत्यधिक छिड़काव से भी फसल की वृद्धि प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही मिट्टी में केंचुओं की संख्या में कमी आने से मिट्टी की उर्वरता पर भी असर पड़ रहा है। केंचुए मिट्टी को भुरभुरा बनाने के साथ जैविक पदार्थों के अपघटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।मियाना निवासी किसान जितेंद्र मीणा और हथौली निवासी जीतू मीणा ने बताया कि पहले फसल की कटाई मजदूरों से कराई जाती थी। इससे खेत में भूसा मिल जाता था, जिसका उपयोग पशुओं के चारे और बिक्री में किया जाता था। अब मजदूरी बढ़ने से एक बीघा फसल की कटाई पर करीब 3 हजार रुपए तक खर्च आ रहा है। ऐसे में किसान कंबाइन मशीन से कटाई को प्राथमिकता दे रहे हैं। कम पैदावार, बढ़ती लागत और मजदूरी के कारण खरीफ की फसल से मिलने वाला मुनाफा प्रभावित हुआ है। सोयाबीन के साथ क्षेत्र में उड़द की फसल भी अपेक्षित पैदावार नहीं दे पा रही है। किसानों के अनुसार एक बीघा में उड़द की करीब एक से डेढ़ बोरी ही उपज निकल रही है। किसान धर्मेन्द्र गौड़ ने बताया कि इस बार मानसून समय पर सक्रिय नहीं होने और बारिश के समय में बदलाव का असर खरीफ की फसलों पर पड़ा है। जहां एक बीघा में सोयाबीन की दो-तीन बोरी तक उपज की उम्मीद रहती है, वहां कई खेतों में एक बोरी भी मुश्किल से निकल रही है। उड़द की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।

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