गुरु प्रदोष और मासिक शिवरात्रि का संयोग आज
आश्विन कृष्ण पक्ष की मासिक शिवरात्रि गुरुवार को होने से शिवालयों में पूजा-अर्चना और अभिषेक करने की शुभ मान्यता रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल भगवान शिव की आराधना के लिए फलदायी माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक कर बिल्व-पत्र, धतूरा, शमी पत्र व सफेद पुष्प अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु भगवान शिव का ध्यान करते हुए ओम नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करेंगे। आचार्य पं. प्रदीप ने बताया कि गुरु प्रदोष पर श्रद्धाभाव से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि, आरोग्य का वरदान मिलने, शत्रु बाधाओं से मुक्ति की धार्मिक मान्यता है। व्रत के दौरान सात्विक भोजन करने और तामसिक पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। गुरुवार को मासिक शिवरात्रि पर रात में निशीथकाल के दौरान भगवान शिव का अभिषेक और पूजन किया जाएगा। श्रद्धालु रात्रि जागरण कर शिव मंत्रों का जाप करेंगे। शिवलिंग पर कटे-फटे या सूखे बिल्व-पत्र नहीं चढ़ाने चाहिए। पूजा में केतकी के फूल, तुलसी के पत्ते, हल्दी और सिंदूर नहीं लिया जाता। पूजा के दौरान सात्विक आचरण रख क्रोध, द्वेष और असत्य भाषण से बचने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
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