एक ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने के लिए हमारी जरूरत:लखनऊ में नियोजन विभाग के आउटसोर्स कर्मी बोले- कोई सुन नहीं रहा, 25 दिन से धरना
यूपी को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य से हम नियोजन विभाग के तहत सर्वेयर का काम कर रहे थे। 700 आउटसोर्स कर्मचारी डेटा जुटाने का काम कर रहे थे। एक साल काम करने के बाद अचानक से हमें निकाल दिया गया। 1 जुलाई से अचानक हम बेरोजगार हो गए। जब कही कोई सुनवाई नहीं हुई तब 14 सितंबर से इको गार्डन में धरने पर बैठ गए।।पर अब तक किसी ने कोई बात तक नहीं की। क्या अब टॉप इकोनॉमी बनाने का टारगेट सब कोई भूल चुका है। आखिर 700 कर्मियों का काम कैसे 105 फुल टाइम एम्प्लॉई करेंगे? ये कहना है सुग्रीव का। नियोजन विभाग के सुपरवाइजर और सर्वेयर पद पर तैनात आउटसोर्स कर्मियों के धरने की अगुवाई कर रहे सुग्रीव कहते है कि उन सभी को बहाल किया जाए।
दरसअल, लखनऊ के इको गार्डन में नियोजन विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों का धरना 25 दिन से जारी है। सुपरवाइजर और सर्वेयर के पद पर काम करने वाले 700 कर्मचारियों की नौकरी वापसी की मांग को लेकर ये धरना चल रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि PLES और ASUSE सर्वेक्षण का काम अब भी जारी है, लेकिन उन्हें हटाकर इसकी जिम्मेदारी विभाग के 105 सहायक सांख्यिकीय अधिकारियों (ASO) को दे दी गई है। ऐसे में सवाल है कि इतने कम अधिकारी सर्वे और डेटा कलेक्शन का काम कैसे पूरा करेंगे। ‘कोई सुनवाई नहीं हो रही’ सुग्रीव कहते हैं कि वे अर्थ एवं संख्या प्रभाग में सुपरवाइजर के पद पर काम कर रहे थे। कर्मचारियों की मांग है कि मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात कराई जाए, ताकि अपनी बात रख सकें। विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि सर्वेक्षण बंद कर दिया गया है या अब भी जारी है। PLFS में बेरोजगारी, ASUSE में कारोबार का सर्वे कुशीनगर से धरने में शामिल होने आए दिलीप ने बताया कि उनकी नियुक्ति सुपरवाइजर और सर्वेयर के पद पर हुई थी। बाद में काम को दो अलग-अलग सर्वेक्षणों में बांटा गया। इनमें PLFS और ASUSE शामिल हैं। PLFS यानी पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के जरिए रोजगार और बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े जुटाए जाते हैं। वहीं, ASUSE यानी असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण में छोटे कारोबार, दुकानों और गैर-कॉरपोरेट उद्यमों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाती है। इन आंकड़ों से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों की स्थिति समझने में मदद मिलती है। चार साल तक सर्वे चलाने की हुई थी संस्तुति कर्मचारियों का कहना है कि दोनों सर्वेक्षणों को चार साल तक जारी रखने की संस्तुति की गई थी। इसके लिए अनुमानित खर्च का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था। उनका दावा है कि एक साल तक सर्वेक्षण का काम ठीक से किया गया और न तो कर्मचारियों के काम को लेकर कोई शिकायत थी और न ही एजेंसी के खिलाफ कोई प्रतिकूल रिपोर्ट थी। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि विभाग के 105 सहायक सांख्यिकीय अधिकारियों को सर्वेक्षण में लगाने से दूसरे विभागीय काम प्रभावित हो सकते हैं। उनके मुताबिक, जुलाई से सितंबर तक की सर्वे और डेटा कलेक्शन रिपोर्ट भी अपडेट नहीं हो सकी। काम की स्थिति को देखते हुए 28 सितंबर को प्रशिक्षण गोष्ठी आयोजित करनी पड़ी। बहाली की मांग, परिवारों पर आर्थिक संकट कर्मचारियों ने सेवा बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि परियोजनाएं जारी हैं और बजट भी उपलब्ध है। इसके बावजूद नौकरी से हटाए जाने के कारण करीब 700 परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों को आशंका है कि दोबारा टेंडर कर किसी दूसरी एजेंसी के जरिए नए लोगों की नियुक्ति की जा सकती है। वे पुराने कर्मचारियों को ही काम पर वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)