एनएच-233 का भूमि अधिग्रहण रद्द:कोर्ट ने कलेक्टर का अवार्ड निरस्त, बाजार मूल्य और जमीन की वास्तविक स्थिति देखने को कहा
अम्बेडकरनगर टांडा के धौरहरा गांव में एनएच-233 चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे पर जिला जज चंद्रोदय कुमार की अदालत ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कलेक्टर/मध्यस्थ के 18 अप्रैल 2022 के अवार्ड और बाद के आदेश को रद्द कर दिया। मुआवजे का नए सिरे से निर्धारण करने के लिए मामला कलेक्टर को वापस भेजा गया है। धौरहरा के राजेंद्र प्रसाद समेत पांच लोगों ने अवार्ड को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि मुआवजा तय करते समय जमीन की असली बाजार कीमत को ठीक से ध्यान में नहीं रखा गया। मंगलवार को सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि जमीन का मूल्यांकन सिर्फ सरकारी कागजों में कृषि भूमि दर्ज होने के आधार पर हुआ। खतौनी में कृषि दर्ज होना बाजार मूल्य का आखिरी आधार नहीं। जमीन की वास्तविक स्थिति, सड़क से पहुंच, आसपास का विकास और भविष्य में इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी विचार होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी पाया कि कुछ ज्यादा मूल्य वाले बिक्री विलेखों को बिना जांच रिपोर्ट के तुलना के लायक नहीं माना गया। इसे मुआवजा निर्धारण में कमी माना गया। जिला जज ने कलेक्टर के अवार्ड और आदेश रद्द करते हुए, कानून के हिसाब से सभी जरूरी बातों और असली बाजार मूल्य को ध्यान में रखकर जमीन के मुआवजे का नए सिरे से निर्धारण का निर्देश दिया। इससे प्रभावित भूमि मालिकों को उचित मुआवजा मिलने की उम्मीद है।
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