फायर सेफ्टी का बुझा हुआ सिस्टम, देश के बड़े शहरों में आजतक के रियलिटी चेक ने खोली सुरक्षा इंतजामों की पोल

दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड के बाद आजतक द्वारा किए गए रियलिटी चेक में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ और पटना समेत कई बड़े शहरों की फायर सेफ्टी व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आई हैं। कहीं एक ही निकासी मार्ग है, कहीं फायर बॉक्स जाम हैं, कहीं उपकरण एक्सपायर हैं और कहीं गैस सिलेंडर असुरक्षित तरीके से रखे गए हैं। यह स्थिति बताती है कि देश के कई हिस्सों में फायर सेफ्टी सिस्टम कागजों पर सक्रिय और जमीन पर निष्क्रिय नजर आ रहा है।

फायर सेफ्टी का बुझा हुआ सिस्टम, देश के बड़े शहरों में आजतक के रियलिटी चेक ने खोली सुरक्षा इंतजामों की पोल

दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 05 जून 2026

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे देश में फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह हादसा केवल एक होटल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देशभर के होटलों, हॉस्टलों और व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को भी सामने ला दिया। हादसे के बाद आजतक की टीम ने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ और पटना समेत कई बड़े शहरों में जमीनी पड़ताल की। इस जांच में जो तस्वीर सामने आई, उसने सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविकता और सरकारी निगरानी दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए। कहीं आपातकालीन निकासी मार्ग नहीं मिले, कहीं फायर बॉक्स जाम मिले, कहीं फायर सेफ्टी उपकरण एक्सपायर पाए गए तो कहीं एक ही रास्ते से लोगों का प्रवेश और निकास हो रहा था। कई स्थानों पर करोड़ों रुपये के सुरक्षा दावे केवल कागजों तक सीमित दिखाई दिए।

दिल्ली में रिहायशी इमारतों में चल रहा व्यावसायिक कारोबार

दिल्ली के मालवीय नगर और हौज रानी इलाके में की गई पड़ताल में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। जिस इलाके में हालिया अग्निकांड हुआ, वहां बड़ी संख्या में रिहायशी इमारतों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। आजतक की टीम ने होटल मालिक लवकेश बजाज की एक अन्य संपत्ति का भी पता लगाया। जब टीम वहां पहुंची तो होटल अंदर से बंद मिला और उसके बोर्ड तक हटाए जा चुके थे। जांच में सामने आया कि इलाके की कई बहुमंजिला इमारतें सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं हैं। कई भवनों में बेसमेंट का उपयोग व्यवसाय के लिए किया जा रहा था, जबकि आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए पर्याप्त रास्ते मौजूद नहीं थे। यदि ऐसे भवनों में आग लगती है तो लोगों के फंसने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। दिल्ली सरकार ने अवैध रूप से संचालित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है, लेकिन सवाल यह है कि राजधानी में हजारों ऐसी इमारतों पर प्रभावी निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

मुंबई में पहचान बताते ही बदल गया रवैया

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं मिली। दक्षिण मुंबई के बैलार्ड एस्टेट क्षेत्र में स्थित एक इमारत में होटल और लड़कों का हॉस्टल संचालित होता मिला। शुरुआती बातचीत में कर्मचारियों ने सामान्य जानकारी दी, लेकिन जैसे ही टीम ने फायर सेफ्टी जांच की बात कही, कर्मचारियों ने जानकारी देने से इनकार कर दिया और टीम को परिसर छोड़ने के लिए कहा। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि इमारत में केवल एक ही प्रवेश और निकास मार्ग था। किसी बड़े हादसे की स्थिति में यह व्यवस्था बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

80 साल पुरानी इमारत में संचालित डॉरमेट्री

मुंबई के पी.डी. मेलो रोड स्थित एक डॉरमेट्री में सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई दी। प्रबंधन ने दावा किया कि उनके पास सभी आवश्यक अनुमति और अनापत्ति प्रमाण पत्र मौजूद हैं। हालांकि निरीक्षण के दौरान एक आपातकालीन निकासी द्वार बंद मिला। कर्मचारियों ने इसका कारण वातानुकूलन व्यवस्था बताया, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आपातकालीन निकास हमेशा उपयोग योग्य स्थिति में होना चाहिए।

सीएसएमटी के सामने स्थित होटल ने दिखाए दस्तावेज

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के सामने स्थित एक प्रमुख होटल ने अपनी फायर सेफ्टी व्यवस्था का प्रदर्शन किया। होटल प्रबंधन ने दावा किया कि वहां आधुनिक अग्नि सुरक्षा प्रणाली, स्प्रिंकलर नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक अलर्ट सिस्टम और पर्याप्त जल भंडारण की व्यवस्था है। प्रबंधन ने हाल ही में प्राप्त अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र भी दिखाया और कहा कि नियमित निरीक्षण किए जाते हैं।

बेंगलुरु में एक रास्ते के भरोसे सैकड़ों जानें

बेंगलुरु के गांधीनगर क्षेत्र की तस्वीर सबसे अधिक चिंताजनक नजर आई। यह इलाका रेलवे स्टेशन और बस अड्डे के निकट स्थित है और यहां बड़ी संख्या में होटल, लॉज और गेस्ट हाउस संचालित होते हैं। आजतक की पड़ताल में कई ऐसी गलियां मिलीं जहां एक समय में केवल एक वाहन ही निकल सकता है। ऐसे में यदि किसी भवन में आग लग जाए तो दमकल वाहनों को मौके तक पहुंचने में भारी कठिनाई हो सकती है। कई इमारतों में केवल एक ही प्रवेश और निकास मार्ग मिला। किसी भी बहुमंजिला भवन के लिए यह स्थिति अत्यंत खतरनाक मानी जाती है क्योंकि आग लगने की स्थिति में लोगों के पास बच निकलने का दूसरा विकल्प नहीं होता।

लखनऊ में फायर बॉक्स जाम और रिसते पाइप

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नगर स्थित एक होटल की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। निरीक्षण के दौरान कई फायर सेफ्टी उपकरणों की वैधता समाप्त हो चुकी थी। कई उपकरण पुराने और अनुपयोगी अवस्था में मिले।

फायर बॉक्स तक नहीं खुल रहा था

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि होटल में लगा फायर बॉक्स पूरी तरह जाम मिला। आपातकालीन स्थिति में कांच तोड़ने के लिए आवश्यक हथौड़ा भी मौजूद नहीं था। यदि आग लग जाती तो शुरुआती बचाव कार्य तक करना मुश्किल हो सकता था।

रिसते पाइप ने बढ़ाई चिंता

होटल के किचन क्षेत्र के पास लगी फायर लाइन से लगातार पानी रिस रहा था। कर्मचारियों ने बताया कि आग लगने पर इसी पाइप का उपयोग किया जाता है।  रिसाव फायर सिस्टम की कार्यक्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

खुले में रखे गैस सिलेंडर

होटल परिसर के बाहर गैस सिलेंडर खुले में रखे मिले। इनके आसपास बिजली के खुले तार भी मौजूद थे। ऐसी स्थिति किसी भी समय बड़े विस्फोट या अग्निकांड का कारण बन सकती है। चौंकाने वाली बात यह है कि स्थानीय लोगों के अनुसार हाल ही में फायर विभाग की टीम यहां निरीक्षण कर चुकी थी।

पटना में छोटे होटलों की सुरक्षा भगवान भरोसे

बिहार की राजधानी पटना में बड़े होटलों में फायर सेफ्टी व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई दी, लेकिन छोटे होटलों की स्थिति चिंताजनक रही। पटना जंक्शन के पास स्थित होटल गली में अधिकांश छोटे होटल केवल छोटे अग्निशमन सिलेंडरों के भरोसे संचालित होते पाए गए। कई होटलों में पाए गए सिलेंडरों की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी। कई संचालकों ने स्वीकार किया कि उनके यहां अभी तक आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं लगाए गए हैं और भविष्य में व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

21 मौतों के बाद भी नहीं जागा सिस्टम

दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में 21 लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन रियलिटी चेक में सामने आया कि कई शहरों में आज भी सुरक्षा नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित है। कई होटलों में:

  • आपातकालीन निकास मार्ग नहीं हैं
  • फायर अलार्म निष्क्रिय हैं
  • फायर बॉक्स जाम हैं
  • अग्निशमन यंत्र एक्सपायर हो चुके हैं
  • गैस सिलेंडर असुरक्षित तरीके से रखे गए हैं
  • भवनों का संचालन नियमों के विपरीत हो रहा है