430 करोड़ खर्च फिर भी प्यासे गांव, झाबुआ में जल जीवन मिशन पर उठे बड़े सवाल
मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में जल जीवन मिशन के तहत 430 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने के बावजूद कई गांवों में लोगों को पेयजल नहीं मिल रहा है। कहीं पाइपलाइन होने के बावजूद पानी नहीं पहुंच रहा, तो कहीं करोड़ों रुपये की टंकियां और जल शुद्धिकरण प्रणालियां निष्क्रिय पड़ी हैं। जमीनी हालात और सरकारी दावों के बीच बड़ा अंतर सामने आने से योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दि राइजिंग न्यूज़। झाबुआ। 05 जून 2026
मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये खर्च होने और सैकड़ों गांवों में योजना पूरी होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। आजतक की पड़ताल में सामने आया कि जिले के कई गांवों में लोग आज भी पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि कागजों में परियोजनाएं पूरी होकर पंचायतों को सौंपी जा चुकी हैं।
430 करोड़ रुपये खर्च, फिर भी पानी का संकट
सरकारी आंकड़ों के अनुसार झाबुआ जिले के 713 गांवों में से 519 गांवों में जल जीवन मिशन के कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इन परियोजनाओं पर अब तक 430 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कई गांवों में घर-घर नल जल पहुंचाने का दावा धरातल पर सफल होता नजर नहीं आ रहा। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद उन्हें आज भी पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
महिलाओं की मजबूरी, एक किलोमीटर दूर से ला रहीं पानी
झाबुआ जिले के खेड़ा गांव में पानी की समस्या बेहद गंभीर दिखाई दी। गांव की महिलाएं सिर पर मटके और बर्तन रखकर करीब एक किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। रास्ता पथरीला और ऊबड़-खाबड़ है, जबकि तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। महिलाएं सूखी भामची नदी के बीच खोदे गए गड्ढों से पानी निकालती हैं और उसे घर तक पहुंचाती हैं। ग्रामीणों के अनुसार प्रतिदिन दो से तीन घंटे केवल पानी लाने में खर्च हो जाते हैं। कई परिवारों को जरूरत अधिक होने पर दिन में दो बार यह कठिन सफर तय करना पड़ता है।
चार साल पहले बिछी पाइपलाइन, आज तक नहीं पहुंचा पानी
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2022 में जल जीवन मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन बिछाई गई थी। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज तक घरों में नल जल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपलाइन तो बिछ गई लेकिन न तो व्यवस्था पूरी हुई और न ही नियमित जल आपूर्ति शुरू की गई।
जहां नल लगे हैं, वहां भी नहीं आ रहा पानी
पारा पंचायत के बखतपुरा वार्ड में हालात और भी चौंकाने वाले हैं। यहां घरों के बाहर नल तो लगे हुए हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आता। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आज भी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। कई परिवार हर महीने पानी खरीदने के लिए अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं। घरों के बाहर बड़े ड्रम रखे गए हैं जिनमें टैंकर का पानी जमा किया जाता है। स्थिति इतनी खराब है कि कई स्थानों पर ग्रामीणों ने सूखे पड़े नलों से अपनी बकरियां बांध रखी हैं।
सात बार शिकायत, फिर भी नहीं हुआ समाधान
स्थानीय निवासी सतीश के अनुसार पानी की समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को सात बार शिकायत पत्र भेजा गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि जल आपूर्ति नहीं होने के बावजूद उनसे जल कर जमा कराने का दबाव बनाया जाता है।
50 हजार लीटर की टंकी लगभग खाली
धांधलपुरा गांव में एक बड़ी पानी की टंकी बनाई गई है जिसकी क्षमता 50 हजार लीटर बताई जाती है। ग्रामीणों के अनुसार शुरुआती दिनों में कुछ समय तक पानी मिला, लेकिन बाद में आपूर्ति लगभग बंद हो गई। टंकी के परिसर में स्थापित जल शुद्धिकरण प्रणाली भी बंद पड़ी मिली। मशीन पर धूल जमी हुई थी और उसके तार खुले दिखाई दिए। ग्रामीणों का दावा है कि प्रणाली को चलाने के लिए आवश्यक बिजली कनेक्शन ही उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण लाखों रुपये की मशीन कभी उपयोग में नहीं आ सकी।
विभाग ने क्या कहा
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि परियोजनाएं पूरी होने के बाद उन्हें पंचायतों को सौंप दिया जाता है। इसके बाद संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर होती है। वहीं विभागीय मंत्री ने कहा कि कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी और भूजल स्तर में गिरावट के कारण जल आपूर्ति प्रभावित हुई है। सरकार समस्या के समाधान के लिए काम कर रही है।