आरबीआई समेत इन संस्थानों में 5 दिन काम, बैंकों में कब होगी शुरुआत

देश के कई प्रमुख वित्तीय संस्थानों में सामान्य तौर पर सप्ताह में पांच दिन काम की व्यवस्था है। भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय जीवन बीमा निगम, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और नाबार्ड इसके प्रमुख उदाहरण हैं। वहीं बैंक यूनियनें सार्वजनिक और वाणिज्यिक बैंकों में भी शनिवार-रविवार अवकाश की मांग कर रही हैं।

Sep 30, 2026 - 15:45
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आरबीआई समेत इन संस्थानों में 5 दिन काम, बैंकों में कब होगी शुरुआत

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 30 सितंबर 2026

देश के बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की सप्ताह में पांच दिन काम की मांग लंबे समय से चली आ रही है। बैंक कर्मचारी संगठनों की ओर से शनिवार और रविवार को नियमित अवकाश देने की मांग की जा रही है। इसी मांग को लेकर सितंबर 2026 में प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल फिलहाल टाल दी गई है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि देश के किन प्रमुख वित्तीय संस्थानों में पहले से पांच दिन काम की व्यवस्था है।

आरबीआई में पांच दिन का काम

भारतीय रिजर्व बैंक देश का केंद्रीय बैंक है और इसके कार्यालयों में सामान्य तौर पर सोमवार से शुक्रवार तक कामकाज होता है। शनिवार और रविवार को नियमित कार्यालयी अवकाश रहता है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों या आवश्यक सेवाओं से जुड़े काम अलग व्यवस्था के तहत हो सकते हैं। बैंक कर्मचारियों की पांच दिन काम की मांग में आरबीआई का उदाहरण भी अक्सर दिया जाता है।

भारतीय जीवन बीमा निगम में भी पांच दिन काम

भारतीय जीवन बीमा निगम देश की प्रमुख बीमा संस्थाओं में शामिल है। इसके कार्यालयों में सामान्य तौर पर सप्ताह में पांच दिन कामकाज की व्यवस्था रहती है। शनिवार और रविवार को नियमित कार्यालयी काम नहीं होता है। इसी वजह से बैंक कर्मचारी संगठन अन्य वित्तीय संस्थानों की कार्यप्रणाली का उदाहरण देते हुए अपनी मांग रखते रहे हैं।

सेबी के कार्यालयों में पांच दिन काम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड देश के प्रतिभूति बाजार के नियमन और निगरानी की महत्वपूर्ण संस्था है। इसके कार्यालयों में सामान्य तौर पर सोमवार से शुक्रवार तक कामकाज होता है। शनिवार और रविवार को नियमित कार्यालयी अवकाश रहता है। शेयर बाजार से संबंधित नियामकीय गतिविधियों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

बीएसई में भी पांच दिन का कार्य सप्ताह

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज देश के प्रमुख शेयर बाजारों में से एक है। यहां सामान्य बाजार गतिविधियों और नियमित कार्यालयी कामकाज के लिए पांच दिन का सप्ताह लागू है। शनिवार और रविवार को नियमित शेयर कारोबार नहीं होता है। शेयर बाजार की छुट्टियों और विशेष कारोबारी सत्रों की व्यवस्था अलग से तय की जा सकती है।

एनएसई में पांच दिन काम की व्यवस्था

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज भी देश के प्रमुख शेयर बाजारों में शामिल है। इसके नियमित कारोबारी और कार्यालयी कामकाज में सोमवार से शुक्रवार तक का कार्य सप्ताह देखने को मिलता है। शनिवार और रविवार को सामान्य तौर पर नियमित शेयर कारोबार नहीं होता है। बाजार के विशेष सत्र या अन्य व्यवस्थाएं अलग कार्यक्रम के अनुसार हो सकती हैं।

नाबार्ड में भी पांच दिन काम

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक कृषि तथा ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ी वित्तीय और विकास संबंधी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके कार्यालयों में सामान्य तौर पर सोमवार से शुक्रवार तक कामकाज होता है। शनिवार और रविवार को नियमित कार्यालयी अवकाश रहता है। बैंक कर्मचारियों के संगठन नाबार्ड जैसी संस्थाओं में लागू व्यवस्था का भी उल्लेख करते हैं।

सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में क्या स्थिति है

वाणिज्यिक और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अभी सभी शनिवारों को नियमित अवकाश की व्यवस्था लागू नहीं है। बैंक यूनियनें लंबे समय से सप्ताह में पांच दिन काम और शनिवार-रविवार की छुट्टी की मांग कर रही हैं। उनका तर्क है कि कई वित्तीय संस्थानों में पांच दिन का कार्य सप्ताह होने के कारण बैंक कर्मचारियों को भी ऐसी व्यवस्था मिलनी चाहिए।

सितंबर की प्रस्तावित बैंक हड़ताल फिलहाल टली

पांच दिन काम की मांग को लेकर सितंबर 2026 में बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल प्रस्तावित थी। हालांकि, भारतीय बैंक संघ और बैंक यूनियनों के बीच उच्च स्तरीय समिति गठित किए जाने के बाद इस हड़ताल को फिलहाल टाल दिया गया है। अब आगे की बातचीत और समिति की प्रक्रिया के बाद इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

बैंक कर्मचारी क्यों कर रहे हैं पांच दिन काम की मांग

बैंक कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आरबीआई, बीमा क्षेत्र और शेयर बाजार से जुड़ी कई प्रमुख संस्थाओं में पहले से पांच दिन का कार्य सप्ताह है। ऐसे में बैंक कर्मचारियों को भी शनिवार और रविवार का नियमित अवकाश दिया जाना चाहिए। इस मांग को लेकर बैंक यूनियनें लंबे समय से सरकार और संबंधित संस्थाओं के सामने अपना पक्ष रखती रही हैं।

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