घाघरा नदी में छोड़ी गईं 50 हजार छोटी मछलियां:मछुआरों की आजीविका को मिलेगा सहारा, संजय सेतु घाट पर हुआ रीवर रैचिंग प्रोग्राम
बाराबंकी के रामनगर स्थित संजय सेतु घाट पर बुधवार दोपहर 3 बजे रीवर रैचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार की योजना के तहत घाघरा नदी में 50 हजार मत्स्य अंगुलिकाएं (छोटी मछलियां) छोड़ी गईं। विधान परिषद सदस्य अंगद सिंह ने इन्हें नदी में प्रवाहित किया। कार्यक्रम में मत्स्य विभाग समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। घाघरा की पारिस्थितिकी सुधारने का प्रयास मत्स्य विभाग के अच्छेलाल निषाद ने बताया कि योजना का उद्देश्य घाघरा नदी की पारिस्थितिकी को बेहतर करना, मछली उत्पादन बढ़ाना और मछुआरा समुदाय की आजीविका को सहारा देना है। नदी में मत्स्य अंगुलिकाओं के संचय से मछलियों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। नदी को साफ रखने की अपील एमएलसी अंगद सिंह ने कहा कि घाघरा नदी करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ी है। उन्होंने लोगों से नदी को साफ रखने और जलीय जीवों के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने नदी को प्रदूषण से बचाने पर भी जोर दिया। प्रतिबंधित जाल का इस्तेमाल न करने की शपथ कार्यक्रम के दौरान लोगों को नदी में प्रतिबंधित जाल का इस्तेमाल न करने और जलीय जीवों के संरक्षण की शपथ दिलाई गई। अधिकारियों ने नदी के पर्यावरण को सुरक्षित रखने में स्थानीय लोगों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। मछुआरों की आय बढ़ने की उम्मीद अधिकारियों के मुताबिक नदी में मत्स्य अंगुलिकाओं के संचय से मछलियों की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे स्थानीय मछुआरों को अधिक मछली मिलने और उनकी आय में बढ़ोतरी की उम्मीद है। जानें क्या होती हैं मत्स्य अंगुलिकाएं मत्स्य अंगुलिकाएं मछलियों के छोटे बच्चे (juvenile fish/fingerlings) होते हैं, जिन्हें तालाब, झील या नदी में छोड़कर मछलियों की संख्या बढ़ाई जाती है। अंडे से निकलने के बाद मछली जब थोड़ी बड़ी हो जाती है और उसका आकार लगभग उंगली जैसा होता है, उसे “मत्स्य अंगुलिका” या “फिंगरलिंग” कहा जाता है। इन्हें जलाशयों और नदियों में छोड़ा जाता है ताकि मछली उत्पादन बढ़े।
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