गोमती नदी का पानी नीम करोली धाम तक चढ़ा:लखनऊ में भोग बनाने में भी दिक्कत, पुजारी बोले- दीवारें धंस रही हैं
लखनऊ के गोमती नदी में बढ़े जलस्तर का असर गोमती तट स्थित प्राचीन बाबा नीम करोली तपोस्थली पर भी पड़ा है। बाढ़ का पानी मंदिर परिसर के अंदर तक पहुंच गया है। पानी भरने से मंदिर की दीवारें नीचे धंसने लगी हैं। रसोई और कमरों में भी पानी भर गया है। इससे बाबा को भोग लगाने के लिए भोजन तक नहीं बन पा रहा है। मंदिर के मुख्य पुजारी अतुल तिवारी ने बताया कि वह करीब 14-15 साल से मंदिर में सेवा कर रहे हैं। उनके पिता भी यहां पुजारी रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह वही तपोस्थली है, जहां बाबा नीम करोली महाराज गोमती तट पर बैठकर तपस्या करते थे। इसी स्थान से हनुमान सेतु की स्थापना से जुड़ी मान्यता भी है। रसोई में पानी, नहीं बन पा रहा भोग पुजारी के मुताबिक गोमती में पानी का बहाव तेज होने के कारण मंदिर की नींव और आसपास की जमीन पर दबाव बढ़ गया है। मंदिर की कई दीवारें नीचे की ओर धंस रही हैं। दीवारों के आसपास से पानी अंदर आ रहा है। मंदिर की रसोई और रहने वाले कमरों में भी पानी भर गया है। अतुल तिवारी ने बताया कि जिस स्थान पर बाबा का भोग तैयार किया जाता है, वहां भी पानी पहुंच गया है। ऐसे में खाना बनाने और नियमित रूप से भोग लगाने में परेशानी हो रही है। पानी और बढ़ा तो सामान बचाना भी मुश्किल उन्होंने कहा कि गोमती का पानी हर साल धीरे-धीरे मंदिर की ओर की जमीन को काट रहा है। पीछे से मिट्टी कटने के कारण दीवारों पर भी असर पड़ रहा है। सरकार से मांग है कि मंदिर की सुरक्षा के लिए पीछे की तरफ इंटरलॉकिंग और जरूरी निर्माण कराया जाए। एनएन शुक्ला ने कहा कि यहां जिस तरह की व्यवस्था होनी चाहिए, वह नहीं है। बारिश और जलभराव के कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है। छोटे बच्चे डर रहे हैं और महिलाएं भी आने में हिचक रही हैं। इसके बावजूद लोग पानी के बहाव के बीच आकर दर्शन कर रहे हैं।
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