गोंडा में 1600 स्कूलों के नौनिहालों को डेस्क-बेंच का इंतजार:प्राथमिक विद्यालयों के छात्र आज भी टाट-पट्टी और चटाई पर बैठने को मजबूर
गोंडा जिले में संचालित 2609 परिषदीय विद्यालयों को संवारने और आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के दावों के बीच जमीनी हकीकत काफी अलग नजर आ रही है। जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों नौनिहाल आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। जहां एक तरफ कुछ विद्यालयों के बच्चे डेस्क-बेंच पर बैठकर आधुनिक परिवेश में पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालयों के छात्र आज भी टाट-पट्टी और चटाई पर बैठने को मजबूर हैं। एक ही जिले में व्यवस्था के इस दोहरेपन का खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। आज सोमवार 1:30 बजे तक भी 1710 प्राइमरी विद्यालय में से 1600 से अधिक विद्यालय में डेस्क और बेंच उपलब्ध नहीं हो पाया है। बीएसए अमित कुमार सिंह ने आज सोमवार दोपहर 1.30 बजे बताया कि जिले में कुल 2609 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें से उच्च प्राथमिक,कंपोजिट और पीएम-श्री विद्यालयों सहित कुल 900 से ज्यादा स्कूलों में फर्नीचर की आपूर्ति की जा चुकी है,जिससे वहां के छात्रों को टाट-पट्टी से मुक्ति मिल गई है। नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे इसके विपरीत जिले के 1600 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में अब तक फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। कुछ प्राथमिक विद्यालयों में संस्थाओं के माध्यम से फर्नीचर दिया गया है,जबकि शेष सभी प्राथमिक विद्यालयों में आपूर्ति के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है और जल्द ही फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं फर्नीचर ना होने से जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने वाले इन बच्चों की मुश्किलें आगमी सर्दियों के मौसम में सबसे अधिक बढ़ जाती हैं। सुबह के समय फर्श की तेज ठंडक बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर बुरा असर डालती है। घंटों ठंडी जमीन पर टाट-पट्टी के सहारे बैठने से मासूम असहज महसूस करते हैं, जिससे उनका ध्यान पढ़ाई में नहीं लग पाता। जन सहयोग से उपलब्ध कराई जा सकती है डेस्क और बेंच विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकारी बजट की प्रतीक्षा करने के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं, सीएसआर फंड और स्थानीय सांसद,विधायक व एमएलसी निधि के सहयोग से भी प्राथमिक विद्यालयों में त्वरित गति से डेस्क-बेंच की व्यवस्था कराई जा सकती है। जब तक यह सुविधा नहीं मिलती,तब तक नौनिहालों का बचपन यूं ही ठंडी जमीन पर सिमटा रहेगा। बीएसए ने आगे कहा कि हम प्रयास कर रहे हैं कि बचे हुए विद्यालय में भी जल्द सुविधा उपलब्ध हो जाए ताकि हमारे बच्चों को दिक्कत ना हो।
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