गोंडा में बाढ़ से 23000 की आबादी परेशान:घाघरा नदी खतरे के निशान से 21 सेंटीमीटर नीचे बह रही, कटान से बढ़ी मुश्किलें
गोंडा में आज शुक्रवार सुबह 9 बजे घाघरा नदी लाल निशान से 21 सेंटीमीटर नीचे दर्ज की गई। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक बीते 24 घंटों के दौरान इसमें 27 सेमी की गिरावट आई है। कल गुरुवार सुबह 8:00 बजे नदी खतरे के निशान से 6 सेंटीमीटर ऊपर थी लेकिन आज नीचे पहुंच गई है। हालांकि कई गांव के किनारे औऱ अंदर से बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही तटवर्ती इलाकों में कटान की नई विभीषिका शुरू हो गई है। जिससे ग्रामीणों की दुश्वारियां दोहरी हो चुकी हैं। नदी का जलस्तर कम होने के बाद भी तरबगंज व करनैलगंज तहसीलों के करीब 27 मजरों की 23 हजार जनता जलप्रलय का दंश झेल रही है। प्रमुख रूप से ब्योन्दा माझा,दत्तनगर साखीपुर, गोकुला,तुलसीपुर,इंदरपुर, चौखड़िया,मंहगूपुर,जैतपुर राठ, दुल्लापुर,दुर्गागंज,ऐली परसौली, परास पट्टी पुरवार,नकहरा,गौरा सिंहनापुर एवं बसहिया के आवासीय परिसरों में अभी भी पानी भरा है। गांव के चारों तरफ पानी भरा हुआ है मुख्य संपर्कों पर रुकावट बनी हुई है,जिसके चलते रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त नजर आ रही है। रास्तों के जलमग्न होने के कारण ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नावों के सहारे आवाजाही करने को विवश हैं। बाढ़ के आगोश में समाई पांच सौ से अधिक काश्तकारों की लगभग पंद्रह सौ बीघा खेती पूरी तरह नष्ट होने के कगार पर पहुंच गई है। खेतों में सिल्ट और पानी रुकने से किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। आपदा प्रबंधन के तहत प्रभावित बस्तियों में आवागमन सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सौ से ज्यादा नौकाएं तथा ‘हनुमान रथ’ तैनात किए हैं। बीते दिन दिनों में बीस हजार से अधिक तैयार भोजन के पैकेट बांटे गए,जबकि एक हजार पीड़ित परिवारों तक राशन किट पहुंचाई जा चुकी है। अधिकारी लगातार कटान प्रभावित तटबंधों की निगरानी में जुटे हैं। नदी के लगातार जलस्तर घटना के कारण तटबंध के किनारे भी नदी ने अपनी कटान तेज कर दी है जहां तटबंध को बचाने के लिए भी बाढ़ विभाग द्वारा 24 घंटे कार्य किया जा रहा है। अपर जिलाधिकारी आलोक झा ने बताया कि नदी का पानी कम हो रहा है मुश्किलें अब काम हो रही है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)