गोंडा में घाघरा खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर ऊपर:30 गांवों की 25 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित, मचान पर खाना बना रहे लोग
गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर गुरुवार सुबह 7:30 बजे खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे में नदी का जलस्तर 24 सेंटीमीटर घटा है। जलस्तर कम होने के बावजूद तरबगंज और करनैलगंज तहसील क्षेत्र के करीब 30 गांवों में बाढ़ का असर बना हुआ है। दोनों तहसीलों की लगभग 25 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है। बाढ़ पीड़ितों के सामने रोजमर्रा का जीवन चलाने की बड़ी चुनौती है। तरबगंज तहसील क्षेत्र के ब्योन्दा माझा, दत्त नगर साखीपुर, गोकुला, तुलसीपुर माझा, इंदरपुर, चौखड़िया, मंहगूपुर, जैतपुर माझा राठ, दुल्लापुर, दुर्गागंज, ऐली परसौली और परास पट्टी पुरवार समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं करनैलगंज तहसील क्षेत्र के नकहरा, गौरा सिंहनापुर और बसहिया सहित दोनों तहसीलों के करीब 30 गांव प्रभावित हैं। घरों में पानी, मचान पर खाना बना रहे ग्रामीण बाढ़ का पानी घरों में घुसा होने के कारण ग्रामीण मचान बनाकर किसी तरह खाना पकाने और जीवन यापन करने को मजबूर हैं। गांवों के बीच आवागमन के लिए लोगों को बाढ़ के पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। पशुओं के लिए चारे का संकट भी बढ़ गया है। दत्त नगर निवासी बाढ़ पीड़ित पुल्लू और रामदेव ने बताया कि बाढ़ के कारण काफी दिक्कत हो रही है। घरों के अंदर पानी भरा है और सड़कों पर कमर तक पानी है, जिससे आने-जाने में परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से कुछ लोगों को मदद मिल रही है, जबकि कुछ लोग अभी सहायता से वंचित हैं। 10 दिन से स्कूल बंद, 15 हजार से अधिक लंच पैकेट बांटे बाढ़ प्रभावित गांवों में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय बंद हैं। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई करीब 10 दिन से प्रभावित हो रही है। जिला प्रशासन की ओर से बीते 48 घंटे में 15 हजार से अधिक लंच पैकेट का वितरण किया गया है। इसके अलावा 500 से अधिक बाढ़ पीड़ितों को बाढ़ राहत सामग्री भी दी गई है। बाढ़ प्रभावित लोगों के आवागमन के लिए प्रशासन ने 100 से अधिक नाव लगाई हैं। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए हनुमान रथ भी उपलब्ध कराया गया है। जलस्तर घटा तो बढ़ी नदी की कटान केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। हालांकि जलस्तर कम होने के साथ ही तटीय इलाकों में नदी की कटान तेज हो गई है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले किसानों के सामने बाढ़ के साथ अब कटान का भी संकट खड़ा हो गया है। ब्योन्दा माझा निवासी प्रदीप ने बताया कि उन्हें बाढ़ राहत सामग्री और लंच पैकेट मिल रहा है, लेकिन बाढ़ के पानी के कारण काफी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी कम होने के बावजूद गांवों में बाढ़ का असर बना हुआ है और कटान बढ़ने से उनकी चिंता और बढ़ गई है।
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