गोंडा में वाम दलों का प्रदर्शन:मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने और SIR पर रोक की मांग
गोंडा में वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों द्वारा गुरुवार दोपहर 2:00 बजे भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली,मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और आयोग के भीतर पारदर्शिता के अभाव को लेकर गोंडा अंबेडकर चौराहे से गोंडा डीएम कार्यालय तक विरोध प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों और जिलाधिकारी के माध्यम से भारत की राष्ट्रपति को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा,जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। वाम दलों ने अपने ज्ञापन में हालिया आई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए। ईश्वर शरण जिला महामंत्री भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी गोंडा, कौशल पांडे और जमाल खान व अधिवक्ता दीनानाथ त्रिपाठी ने कहा कि त्रिसदस्यीय निर्वाचन आयोग के दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों। 14 बार लिखित रूप से असहमति सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों के भीतर आयोग के विभिन्न नीतिगत फैसलों पर 14 बार लिखित रूप से असहमति व आपत्तियां दर्ज कराई हैं। आयोग में मतदाता सूची से नाम हटाने,नए मतदाताओं के पंजीकरण और संपूर्ण मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण को लेकर दोनों आयुक्तों द्वारा व्यक्त की गई चिंताएं यह स्पष्ट करती हैं कि निर्वाचन आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और निष्पक्षता गंभीर संकट में है। आंतरिक मतभेदों और कार्यशैली की स्वतंत्र जांच नेताओं ने इसे नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने का असंवैधानिक प्रयास करार दिया। वाम दलों के देशव्यापी आह्वान के तहत आयोजित इस धरने में राष्ट्रपति से पांच सूत्रीय मांगें की गईं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाकर आंतरिक मतभेदों और कार्यशैली की स्वतंत्र जांच कराई जाए। विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और गैर-कानूनी ढंग से हटाए गए। संयुक्त सहभागिता सुनिश्चित सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बहाल किए जाएं। आयोग के फैसलों में सभी आयुक्तों की सामूहिक सहमति अनिवार्य कर स्वायत्तता बहाल की जाए। आयुक्तों के चयन पैनल में मुख्य न्यायाधीश प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष की संयुक्त सहभागिता सुनिश्चित हो। संदिग्ध मतदाता विलोपन वाले निर्वाचन क्षेत्रों की उच्चस्तरीय न्यायिक समीक्षा कराई जाए।
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