होर्मुज संकट में बढ़ा तनाव, ईरान और अमेरिका आमने-सामने
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। समुद्री नाकेबंदी और जहाजों की आवाजाही को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है। इस पूरे मामले में पाकिस्तान और कई देशों की कूटनीतिक भूमिका भी सामने आई है।
दि राइजिंग न्यूज़ डेस्क | 18 अप्रैल 2026 ।
तेहरान/लंदन: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर समुद्री नाकेबंदी नहीं हटाई गई तो वह कड़ा जवाब देगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं।
जहाजों की आवाजाही पर आंशिक छूट
ईरान के विदेश मंत्री ने लेबनान में युद्धविराम के बाद कुछ कमर्शियल जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन इसके लिए ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। साथ ही सैन्य जहाजों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय पहल
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा है कि होर्मुज को फिर से सुरक्षित और खुला रखना वैश्विक जरूरत है। इस दिशा में दर्जनों देश एक संयुक्त सुरक्षा मिशन पर सहमत हुए हैं। अगले सप्ताह लंदन में एक सैन्य योजना बैठक भी आयोजित की जाएगी, जिसमें इस मिशन की रूपरेखा तय की जाएगी।
ईरान की कड़ी शर्तें
ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस जलमार्ग से केवल उन्हीं जहाजों को गुजरने दिया जाएगा जिन्हें ईरानी प्रशासन की अनुमति प्राप्त होगी। ईरान ने यह भी कहा है कि अगर उसके आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाया गया तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा।
वैश्विक तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलमार्ग को लेकर तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।