हरदोई में सिपाही से 'बढ़िया-हैं' कहते ही हिस्ट्रीशीटर की मौत:24 मुकदमों का आरोपी था, पिता और दोनों भाइयों पर भी दर्जनों केस दर्ज
हरदोई जनपद के बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के ग्राम शादीपुर के मजरा सिंहपुर में पुलिस सत्यापन के दौरान एक सनसनीखेज और दर्दनाक हादसा सामने आया है। 24 मुकदमों के आरोपी 55 वर्षीय हिस्ट्रीशीटर चंद्रहास की पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ही संदिग्ध हालात में मौत हो गई। यह घटना सोमवार के दोपहर बाद करीब 3:30 बजे की है। बेनीगंज कोतवाली के सिपाही अरुण पांडे और धर्मेंद्र चौधरी नियमित सत्यापन के लिए गांव के पंचायत घर पहुंचे थे, जहां चंद्रहास रह रहा था। सिपाही ने उससे पूछा— "चंद्रहास कैसे हो?" इस पर उसने जवाब दिया— "बढ़िया हैं।" लेकिन यह शब्द कहते ही वह अचानक चारपाई से नीचे गिर गया और अचेत हो गया। सिपाही कुछ समझ पाते, तब तक उसकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी। घटना के तुरंत बाद परिजनों ने पुलिस के डर से हार्ट अटैक आने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया, जिससे गांव में तनाव फैल गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीओ हरियावां लक्ष्मीकांत गौतम, बेनीगंज कोतवाल अतुल सिंह समेत संडीला, अतरौली, कछौना, बघौली और हरियावां— कुल 7 थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। सीओ द्वारा परिजनों को समझाने-बुझाने और शांत कराने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक चंद्रहास पर हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, एनडीपीएस और आबकारी अधिनियम जैसे 24 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। साल 2007 में अतरौली थाना क्षेत्र के एक बहुचर्चित अपहरण और हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा हुई थी और वह 2022 में जमानत पर बाहर आया था। हैरान करने वाली बात यह भी है कि चंद्रहास का पूरा कुनबा आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। मृतक के 80 वर्षीय पिता बाबू पर 12 मुकदमे, बड़े भाई राम अवतार पर 12 मुकदमें और छोटे भाई हरिश्चंद्र पर 10 मुकदमे पहले से दर्ज हैं। यानी चंद्रहास के साथ-साथ उसके पिता और दोनों भाई भी पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर हैं। कोतवाल अतुल सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असल वजह स्पष्ट होगी और उसी आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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