आईआईटी बॉम्बे में साहिल की मौत पर क्यों मचा विवाद

आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद संस्थान में विरोध प्रदर्शन जारी रहा। मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को निलंबित किया गया है और मुंबई अपराध शाखा जांच कर रही है। संस्थान का कहना है कि परीक्षा के दौरान मोबाइल के इस्तेमाल की रिपोर्ट करना शिक्षक का कर्तव्य था, जबकि साहिल के पिता ने प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

Sep 21, 2026 - 12:55
Updated: 25 days ago
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आईआईटी बॉम्बे में साहिल की मौत पर क्यों मचा विवाद

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 21 सितंबर 2026

आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद मामला लगातार गहराता जा रहा है। साहिल की मौत के बाद छात्रों ने लगातार तीन दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया और संस्थान के सामने कई मांगें रखीं। छात्रों की ओर से 18 सूत्रीय मांगों का पत्र सौंपा गया, जिसमें प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ कार्रवाई सहित कई मांगें शामिल थीं। इस बीच मामले की जांच मुंबई अपराध शाखा कर रही है।

18 सितंबर को आखिर क्या हुआ था

18 सितंबर 2026 को आईआईटी बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान विभाग की मध्य-सत्र परीक्षा चल रही थी। प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला परीक्षा में निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। परीक्षा के दौरान उन्होंने द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे के पास मोबाइल फोन देखा। संस्थान के अनुसार, साहिल ने प्रश्नपत्र को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित साधन पर डालकर उत्तर प्राप्त करने का प्रयास किया था। संस्थान के अनुसार, प्रोफेसर दूल्ला ने इस घटना को शैक्षणिक अनियमितता मानते हुए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। परीक्षा के बाद साहिल को बुलाकर समझाया गया और संस्थान का कहना है कि उसे यह भरोसा भी दिलाया गया था कि इस घटना का उसके भविष्य पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। संस्थान ने यह भी कहा कि साहिल के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।

प्रोफेसर पर क्या आरोप लगाए गए हैं

साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पिता का आरोप है कि प्रोफेसर ने साहिल को करीब तीन महीने तक जातिसूचक गालियां दीं और उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। हालांकि, ये आरोप अभी जांच का विषय हैं और इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। आईआईटी बॉम्बे ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। संस्थान का कहना है कि शिक्षकों और प्रशासन के पास विद्यार्थियों की जाति से जुड़ी जानकारी नहीं होती और इस मामले में भी जातिगत भेदभाव की कोई शिकायत पहले संस्थान की अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के पास नहीं आई थी।

प्रोफेसर दूल्ला के निलंबन की वजह क्या है

प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को 20 सितंबर 2026 की शाम निलंबित किया गया। यह कार्रवाई छात्रों के लगातार तीन दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद हुई। छात्रों ने अपनी 18 सूत्रीय मांगों में प्रोफेसर के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग रखी थी। आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों से जुड़े पत्र पर हस्ताक्षर किए।

प्रोफेसर दूल्ला का शैक्षणिक रिकॉर्ड क्या है

प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला आईआईटी बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान विभाग में एक दशक से अधिक समय से अध्यापन कर रहे हैं। उन्हें विद्युत प्रणाली, स्मार्ट विद्युत ग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का विशेषज्ञ बताया गया है। वर्ष 2021 में उन्हें प्रोफेसर एस.पी. सुखात्मे उत्कृष्ट अध्यापन पुरस्कार भी मिला था। वह आईआईटी बॉम्बे में छात्र मामलों के अधिष्ठाता के पद पर भी रह चुके हैं।

छात्रों का गुस्सा किस बात को लेकर है

छात्रों का आरोप है कि साहिल को परीक्षा कक्ष से बाहर निकाला गया और निलंबन की धमकी दी गई थी। दूसरी ओर, आईआईटी बॉम्बे का कहना है कि साहिल के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। छात्रों ने 18 सूत्रीय मांगों में प्रोफेसर दूल्ला के निलंबन के साथ छात्र आत्महत्या रोकने के लिए विशेष कार्यदल बनाने और अनुशासनात्मक मामलों की प्रक्रिया में बदलाव की मांग भी रखी है। छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर शिक्षकों के प्रशिक्षण की भी मांग की है। इसके अलावा मामले की जांच स्वतंत्र समिति से कराने की मांग रखी गई है। छात्रों के अनुसार, इस समिति में विद्यार्थियों के प्रतिनिधि और बाहरी विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने अंतरिम जांच रिपोर्ट 30 सितंबर और अंतिम रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक जारी करने की मांग की है।

आईआईटी बॉम्बे में इस साल कितने ऐसे मामले सामने आए

स्रोत के अनुसार, साहिल वाकोडे की मौत इस वर्ष आईआईटी बॉम्बे में छात्र आत्महत्या का तीसरा मामला है। इससे पहले फरवरी 2026 में छात्रावास संख्या चार में एक छात्र की मौत हुई थी, जबकि जुलाई 2026 में एक अन्य छात्र की आत्महत्या की जानकारी सामने आई थी। स्रोत में देशभर के आईआईटी संस्थानों में 2011 से 2024 के बीच 115 छात्रों की आत्महत्या का आंकड़ा भी दिया गया है।

मामले में अब आगे क्या होगा

फिलहाल इस पूरे मामले की जांच मुंबई अपराध शाखा कर रही है। प्रोफेसर दूल्ला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और उन्हें निलंबित भी किया जा चुका है। दूसरी ओर, आईआईटी बॉम्बे के शिक्षक मंच ने प्रोफेसर का समर्थन किया है और कहा है कि परीक्षा में नियमों के उल्लंघन की रिपोर्ट करना उनकी शैक्षणिक जिम्मेदारी का हिस्सा था। अब जांच के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है

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