आईआईटी बॉम्बे ने मानी छात्रों की 18 मांगें, प्रोफेसर निलंबित

आईआईटी बॉम्बे में साहिल वाकोडे की मौत के बाद पिछले तीन दिनों से छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों ने संस्थान के सामने 18 सूत्रीय मांगें रखी थीं। प्रशासन ने छात्रों के साथ बातचीत के बाद इन मांगों से जुड़े समझौते पर सहमति जताई है। प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला को भी निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

Sep 21, 2026 - 12:29
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आईआईटी बॉम्बे ने मानी छात्रों की 18 मांगें, प्रोफेसर निलंबित

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 21 सितंबर 2026

आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद संस्थान में विरोध प्रदर्शन चल रहा था। छात्रों ने मामले की जांच और संस्थान के स्तर पर कई बदलावों की मांग करते हुए 18 सूत्रीय मांगों का पत्र प्रशासन के सामने रखा था। रविवार, 20 सितंबर की देर रात संस्थान के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच लंबी बातचीत हुई। बातचीत के बाद प्रशासन की ओर से छात्रों की मांगों को लेकर सहमति बनने की जानकारी सामने आई है।

18 सूत्रीय मांगों पर बनी सहमति

आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने छात्रों की ओर से रखे गए 18 सूत्रीय मांगों के पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इन मांगों में साहिल वाकोडे की मौत से जुड़े मामले की स्वतंत्र जांच सहित कई मुद्दे शामिल हैं। छात्रों की मांगों में संस्थान की ओर से साहिल के संबंध में किए गए सामाजिक माध्यम के संदेश में दी गई जानकारी को लेकर सार्वजनिक माफी की मांग भी शामिल है। इन मांगों के आगे की कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी आगामी खुले संवाद कार्यक्रम में दिए जाने की उम्मीद है।

प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला निलंबित

छात्रों की मांगों में संकाय शिक्षक सूर्यनारायण डुल्ला के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल थी। इसके बाद 20 सितंबर की शाम प्रोफेसर डुल्ला को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई। साहिल के पिता की शिकायत के बाद पुलिस ने भी प्रोफेसर डुल्ला के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस की कार्रवाई में आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज किए जाने की बात कही गई है।

जांच को लेकर छात्रों की क्या मांग है

छात्रों ने साहिल वाकोडे की मौत की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही जांच की अंतरिम रिपोर्ट 30 सितंबर और अंतिम रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक जारी करने की मांग रखी गई है। छात्रों ने शिक्षकों के लिए आचार संहिता बनाने और संस्थान के महत्वपूर्ण फैसलों में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की भी मांग की है। इसके अलावा कैंपस अस्पताल में चौबीसों घंटे मनोचिकित्सक की उपलब्धता और परामर्श सेवाओं में सुधार की मांग भी शामिल है।

क्या है पूरा मामला

आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे 18 सितंबर को अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाए गए थे। संस्थान के अनुसार, उसी दिन परीक्षा के दौरान साहिल को मोबाइल फोन से नकल करते हुए पकड़ा गया था। इसके कुछ समय बाद उनकी आत्महत्या की खबर सामने आई। हालांकि, साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने आरोप लगाया कि संकाय शिक्षक सूर्यनारायण डुल्ला पिछले करीब तीन महीने से साहिल को कथित रूप से जातिसूचक गालियां दे रहे थे और इससे वह परेशान था।

पिता ने लगाए गंभीर आरोप

साहिल के पिता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके बेटे को झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी जा रही थी। इस संबंध में उन्होंने पवई पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बाद अपराध शाखा मामले की जांच कर रही है। वहीं, साहिल की मौत को लेकर संस्थान के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया और जिम्मेदार अधिकारियों तथा प्रोफेसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

आगे क्या होगा

18 सूत्रीय समझौते के तहत लिए गए फैसलों को किस तरह लागू किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी आगामी खुले संवाद कार्यक्रम में सामने आने की उम्मीद है। छात्रों ने मांग की है कि तय समयसीमा में मांगें पूरी नहीं होने पर संस्थान के निदेशक, सहयोगी अधिष्ठाता और छात्र मामलों के अधिष्ठाता को अपने पद से इस्तीफा देना होगा। अब इस समझौते के बाद संस्थान की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम पर नजर रहेगी।

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