इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में 6 दिन से भूख हड़ताल पर छात्र:लिखित आदेश-स्थायी प्रॉक्टर नियुक्ति न होने तक अनशन खत्म नहीं
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे छात्र शनिवार को छठे दिन भी अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं। प्रशासन की ओर से कुछ मांगों पर सहमति जताए जाने के बावजूद आंदोलनकारी लिखित आदेश और स्थायी प्रॉक्टर की नियुक्ति न होने तक अनशन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। क्या है मामला छात्रों का आंदोलन मुख्य रूप से फीस वृद्धि, सीटों में कटौती, निलंबित छात्रों की बहाली और परिसर की बुनियादी सुविधाओं को लेकर चल रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की फीस लगातार बढ़ाई गई है, जबकि प्रवेश सीटें कम की गई हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि बीए की फीस 2021 में 930 रुपये थी, जो अब लगभग 6,000 रुपये हो गई है। उन्होंने एमए और पीएचडी की फीस में भी भारी वृद्धि का विरोध किया है तथा सीटों में कटौती को छात्रों के हितों के खिलाफ बताया है। प्रशासन से सहमति, फिर भी अड़े छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के निलंबन वापस लेने, केंद्रीय पुस्तकालय को सुबह 6 बजे से खोलने और छात्रसंघ भवन को आधिकारिक धरनास्थल चिह्नित करने पर सहमति जताई है। निलंबन वापसी व पुस्तकालय संबंधी लिखित आदेश सोमवार तक जारी करने का आश्वासन भी दिया गया है। लेकिन आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि मौखिक सहमति पर्याप्त नहीं है। उन्होंने तीन मांगों का स्पष्ट लिखित आदेश जारी करने और अस्थायी प्रॉक्टर को हटाकर स्थायी प्रॉक्टर की नियुक्ति की मांग की है। स्वास्थ्य को लेकर चिंता आमरण अनशन के दौरान कई अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने से चार छात्रों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि शनिवार को भी पांच छात्र अनशन पर बने हुए हैं। छात्र नेता प्रियांशु विद्रोही ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा। मांगें पूरी न होने की स्थिति में आंदोलनकारियों ने हाईकोर्ट जाने की चेतावनी भी दी है।
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