डिजिटल डेटा सुरक्षा कानून लागू, अब यूज़र्स को मिलेगा अपने डेटा पर पूरा अधिकार
डिजिटल डेटा सुरक्षा कानून लागू, अब यूज़र्स को मिलेगा अपने डेटा पर पूरा अधिकार
डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों और डेटा लीक की घटनाओं के बीच भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए नया डेटा सुरक्षा कानून लागू कर दिया है। इस कानून का उद्देश्य देश के करोड़ों इंटरनेट यूज़र्स के व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखना और कंपनियों की जवाबदेही तय करना है।
इस कानून के तहत अब बड़ी टेक कंपनियों जैसे , और को यूज़र्स के डेटा के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट जानकारी देनी होगी। कंपनियों को यह बताना अनिवार्य होगा कि वे कौन-सा डेटा इकट्ठा कर रही हैं, किस उद्देश्य से कर रही हैं और कितने समय तक उसे स्टोर करेंगी।
सबसे अहम बदलाव यह है कि अब यूज़र्स को अपने डेटा पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। कोई भी व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत जानकारी को हटाने, संशोधित करने या उसके उपयोग को सीमित करने का अधिकार रखेगा। यदि कोई कंपनी बिना अनुमति डेटा का उपयोग करती है या सुरक्षा में लापरवाही बरतती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि यह कानून “डिजिटल इंडिया” अभियान को एक सुरक्षित आधार प्रदान करेगा और लोगों का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भरोसा बढ़ाएगा। साथ ही, यह विदेशी निवेश को भी आकर्षित कर सकता है क्योंकि इससे भारत में डेटा प्रोटेक्शन के स्पष्ट नियम स्थापित होंगे।
हालांकि, इस कानून को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी एजेंसियों को कुछ परिस्थितियों में दी गई छूट का दायरा स्पष्ट होना चाहिए, ताकि नागरिकों की गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रह सके।
कुल मिलाकर, यह कानून भारत में डिजिटल अधिकारों के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो आने वाले समय में टेक कंपनियों और यूज़र्स दोनों के व्यवहार को प्रभावित करेगा।