इरफान सोलंकी के जेल रिहाई के एक साल-इंटरव्यू:बोले- सीसामऊ से नसीम ही चुनाव लड़ेंगी, मौका मिला तो मैं कानपुर में कहीं से लड़ लूंगा

Oct 02, 2026 - 07:58
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इरफान सोलंकी के जेल रिहाई के एक साल-इंटरव्यू:बोले- सीसामऊ से नसीम ही चुनाव लड़ेंगी, मौका मिला तो मैं कानपुर में कहीं से लड़ लूंगा
1013 दिन में विधायक से पूर्व विधायक होते देखा…लोवर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक धर्मपत्नी को चक्कर लगाते देखा…घर की महिला को राजनीति में इंट्री करते देखा… मैं बेकसूर तब भी था अब भी हूं, अल्लाह ने चाहा सुप्रीम कोर्ट से फैसला आएगा तो भी बेकसूर ही रहूंगा। मेरे घर से 3 लोग विधायक रहे, शायद ये पहला घर ऐसा होगा, अब सीसामऊ से तो नसीम ही चुनाव लड़ेगी वो सीट उनकी हो गई… मुझे कोर्ट के फैसले के बाद लड़ने का मौका मिला तो कानपुर में और भी सीटें हैं, लड़ लूंगा…इंशाअल्लाह दो विधायक होंगे…ये कहना है पूर्व विधायक इरफान सोलंकी का जिन्हें जेल से रिहाई के 30 सितंबर को एक साल पूरे हुए हैं। कानपुर की सीसामऊ विधानसभा से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी को जेल से रिहा हुए एक साल पूरा हो गया है। करीब 34 महीने जेल में रहने के बाद वह 30 सितंबर 2025 को महाराजगंज जेल से बाहर आए थे। रिहाई के बाद बीते एक साल बाद उन्होंने राजनीति, सजा पर लगाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई, सीसामऊ सीट और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से अपने संबंधों को लेकर दैनिक भास्कर से बातचीत की… अब पढ़िए इरफान सोलंकी ने जो दैनिक भास्कर के सवालों पर जवाब दिए सवाल- 34 महीनें तक जेल में रहने के बाद रिहा हुए, अब एक साल बाहर आने के बाद हो गए क्या कुछ बीता? राजनीति में क्या कुछ पहले से बदला हुआ महसूस हुआ? जवाब- एक साल की कहानी सिर्फ एक साल से शुरू नहीं होती। इसकी शुरुआत 2 दिसंबर 2022 से हुई, जब मैं जेल गया था। करीब 34 महीने का लंबा सफर रहा और 1013 दिन जेल में रहा। इन 1013 दिनों में मैंने राजनीति में बहुत कुछ बदलते हुए देखा। विधायक से पूर्व विधायक होते हुए देखा। मेरी धर्मपत्नी, जो कल तक घर में रहती थीं, उन्हें लोअर कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चक्कर लगाते देखा। उनकी राजनीति में एंट्री हुई और अल्लाह के करम से सीसामऊ की जनता की दुआओं और आशीर्वाद से वह उस पद पर पहुंचीं। मैं उस समय भी बेकसूर था और आज भी अपने आपको बेकसूर मानता हूं। मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी मेरे पक्ष में आएगा। कहते हैं कि सच परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। मैं परेशान जरूर हुआ, लेकिन पराजित नहीं हुआ। पहले मेरे पिताजी विधायक हुआ करते थे, फिर अल्लाह के करम से मैं विधायक बना। अब इसी परिवार में तीन लोग विधायक रह चुके हैं। मुझे नहीं लगता कि कानपुर में ऐसा कोई और परिवार होगा, जहां जनता ने चुनकर परिवार के तीन लोगों को विधायक बनाया हो। जब मैं जेल गया था, तब घर में तीन गाड़ियां थीं और विधायकी का टाइटल था। जब वापस आया तो अल्हम्दुलिल्लाह आज भी घर में तीन गाड़ियां हैं और विधायकी का टाइटल है। लोग आज भी विधायक कहकर बुलाते हैं। आने वाले समय में राजनीति में काफी बदलाव देखने को मिलेगा। चुनाव में अभी समय है, लेकिन अगले कुछ महीनों में माहौल किस तरह करवट लेता है, यह आप खुद देखेंगे। सवाल- सजा पर रोक लगाए जाने को लेकर आप सुप्रीम कोर्ट गए हैं। क्या उम्मीद है? जवाब- सजा पर रोक की बात जरूर है, लेकिन हमारा पक्ष इससे आगे है। हम यह कह रहे हैं कि मेरे ऊपर जो मुकदमा लगाया गया है, वह ही गलत और बेबुनियाद है। सजा पर रोक का मतलब यह नहीं होता कि मुकदमा सही है। हम उसी मामले में सुप्रीम कोर्ट गए हैं और हमें उम्मीद है कि वहां से न्याय मिलेगा। दो दिन पहले ही मेरे एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और अल्लाह के करम से, जनता के प्यार और मेरे मां की दुआओं से फैसला रिजर्व कर लिया गया है। मुझे पूरा भरोसा है कि आखिर में सच सामने आएगा। सवाल - आप कहते हैं- 'सीसामऊ ही सोलंकी है, सोलंकी ही सीसामऊ।' अगर आपको चुनाव लड़ने का मौका मिला तो सीसामऊ से कौन होगा- नसीम या इरफान? जवाब- सीसामऊ की मौजूदा विधायक मेरी धर्मपत्नी नसीम सोलंकी हैं और वही चुनाव लड़ेंगी। इंशाअल्लाह, वह दोबारा जीतेंगी। उन्होंने बहुत संघर्ष किया है। जो व्यक्ति कुर्सी पर बैठ गया, वह कुर्सी उसकी होती है। मैं बहुत मजबूती से कह रहा हूं कि सीसामऊ का आने वाला चुनाव अगर मुझे मौका मिला, अगर अखिलेश जी टिकट देते हैं, तो सीसामऊ से सिर्फ और सिर्फ नसीम सोलंकी चुनाव लड़ेंगी। जहां तक मेरा सवाल है, अगर मुझे चुनाव लड़ने का मौका मिला तो कानपुर में बहुत सारी विधानसभा सीटें हैं। हम वहां से चुनाव लड़ेंगे। इंशाअल्लाह, दो विधायक होंगे मानकर चलिए। सवाल - जब से आप वापस आए हैं, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से आपकी नजदीकियां बढ़ी हैं। नसीम और आपका त्योहारों पर आना-जाना भी बढ़ा है? जवाब- नहीं, इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना जी से हमारे पुराने संबंध हैं। 1995-96 के आसपास जब हम जाजमऊ आए थे, उस समय लाल बंगले में वीडियो गेम हुआ करते थे। उनके साहबजादे करन हमारे दोस्त की तरह थे। हम साथ में खेलते थे। महाना जी पुराने राजनीतिक व्यक्ति हैं। वह मेरे अब्बा के साथ भी रहे हैं। इसलिए जब भी उनसे मिलता हूं तो उनका हाथ लेकर अपने सिर पर रखता हूं। वह उम्र में मेरे पिता के दर्जे के हैं। आप किसी को प्यार और सम्मान देंगे तो सामने से भी प्यार और सम्मान मिलता है। उनकी आंखों में भी मेरे लिए प्यार है। जहां भी मिलते हैं, सम्मान देते हैं। मैं उन्हें सिर्फ बीजेपी के नेता के तौर पर नहीं देखता। विधानसभा अध्यक्ष का पद अलग होता है। वह सरकार और विपक्ष के बीच एक माध्यम होते हैं। हम विधानसभा में सवाल लगाते हैं, विधानसभा अध्यक्ष उसे सरकार तक पहुंचाते हैं और सरकार की तरफ से जवाब आता है। उनका आशीर्वाद लेना सम्मान की बात है। मैं पहले भी उनका आशीर्वाद लेने जाता रहा हूं और आगे भी जाता रहूंगा। सवाल- आने के बाद बीते एक साल में फिर आपसे कई विवाद जुड़े। सीसामऊ विधानसभा में ही बकरीद से पहले विवाद हुआ और FIR भी दर्ज हुई। इसे कैसे देखते हैं? जवाब- देखिए, एक बात है 'बद अच्छा, बदनाम बुरा।' हम बदनाम हो चुके हैं। जहां मैं मौजूद ही नहीं था, वहां मेरे खिलाफ FIR हो गई। अब पुलिस की कार्रवाई के बारे में मैं पहले ही कह चुका हूं कि अदालत में समय की बात है। धीरे-धीरे सब सामने आएगा। बस इतना कहना चाहता हूं, दिन है तो रात भी आयेगी और रात है तो दिन भी आयेगा।

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