साइबर ठगी के सरगना की तलाश में प्रतापगढ़-झांसी पहुंची पुलिस:संविदाकर्मियों के पीएफ घोटले में भी शामिल था आरोपी, डॉक्टर के ठगे थे 48 लाख
लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे करोड़ों रुपये ठगने वाले साइबर फ्रॉड गिरोह के सरगना मुकुल चौबे की तलाश तेज हो गई है। साइबर थाना पुलिस के मुताबिक बीते दो दिनों से मुकुल का फोन बंद है, इसलिए उसकी लोकेशन नहीं मिल रही है। कानपुर के अलावा उसकी तलाश के लिए पुलिस टीमें प्रतापगढ़ और झांसी भी भेजी गईं हैं। वहीं, मुकुल के तार पीएफ घोटाले से जुड़े एक पत्रकार से भी जोड़े जा रहे हैं। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था बुधवार को स्वरूप नगर निवासी डॉक्टर योगेश चंद्र मिश्रा को डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख की साइबर ठगी करने वाले तीन आरोपियों वासू, आतिश और कंचन प्रजापति को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि गिरोह का सरगना मूल रूप से झांसी निवासी मुकुल चौबे है। मुकुल का नाम पहले भी 2021 में केस्को के पीएफ घोटाले में चर्चा में आया था। 30 अगस्त 2021 को रानीघाट पुराना कानपुर निवासी केस्को में संविदाकर्मी अजय सिंह ने कर्नलगंज थाने में गांधी नगर निवासी मुकुल चौबे और उसके सहयोगियों पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि मुकुल ने ईपीएफ निकलवाने का लालच देकर कर्मचारियों के पीएफ खाते से उनके मूल खाते अलग कर लाखों का गबन किया था। बुधवार को पकड़े गए साइबर ठग प्रतापगढ़ में कार्यालय बनाकर ठगी की रकम बोगस फर्म के खाते में जमा कराते थे। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि साइबर ठगी के तार उन लोगों से भी जोड़कर देखे जा रहे हैं, जिनके नाम मुकुल के साथ पीएफ घोटाले में शामिल थे। 27 बैंकों में पहुंची साइबर ठगी की रकम एडीसीपी अरीबा नोमान ने बताया कि ठगी की रकम पहले बिहार के सरहसा स्थित बैंक ऑफ इंडिया के खाते में पहुंची। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के 27 बैंक खातों में रकम पहुंची। जिसमें एक खाता प्रतापगढ़ के बोकॉयो कांट्रेक्टर प्राइवेट लिमिटेड फर्म का था। उस खाते में 15 बार में 25.98 लाख रुपए पहुंचे थे। जांच में मोबाइल नंबर रायबरेली निवासी आतिश का निकला था। पुलिस को मोबाइल की लोकेशन घंटाघर के सिद्धार्थ होटल की निकली, जहां छापेमारी के दौरान पुलिस ने तीनों को अरेस्ट कर लिया था। आरोपियों ने बताया था कि वह गांधी नगर निवासी मुकुल चौबे के कहने पर सिंडिकेट चला रहे थे। मुकुल चौबे ने उन्हें 10 हजार रुपए की नौकरी पर रखा और फर्जी दस्तावेजों से फर्म खुलवायी।
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