इविवि में 3 दिन से 8 छात्र भूख हड़ताल पर:छात्र बोले-650% फीस वृद्धि और 54% सीट कटौती की गई है
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में तीन दिन से आठ छात्र भूख हड़ताल पर हैं। छात्रों का कहना है कि फीस वृद्धि और सीट कटौती के विरोध में 80 दिन से क्रमिक धरना दे रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसलिए आमरण अनशन पर बैठे हैं। आशुतोष मौर्या, आयुष महात्मा, रोशन माहिर, ऋषि, अमित यादव, राकेश, अंश और आकर्ष पटेल आमरण अनशन पर हैं। 650 फीसदी तक बढ़ी फीस, छात्रों पर भारी बोझ आंदोलनरत छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में बेतहाशा फीस वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा 2021 में बीए की फीस मात्र 930 रुपये थी, जो अब 6,000 रुपये (लगभग 650% वृद्धि) कर दी गई है। इसी प्रकार एमए की फीस 930 से बढ़ाकर 7,000 रुपये और पीएचडी की फीस 500 से 20,000 रुपये तक कर दी गई है। छात्रावास की फीस भी बढ़कर 28,000 रुपये हो गई है, जिससे एक गरीब, किसान और पिछड़े वर्ग के छात्र के लिए एक साथ 35-40 हजार रुपये की फीस चुकाना लगभग असंभव हो गया है। 54% सीटों की कटौती से छात्रों के भविष्य पर संकट आमरण अनशन पर बैठे छात्र आशुतोष मौर्य ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 54 प्रतिशत सीटों की कटौती की है। छात्रों का दावा है कि जहां पहले 30,000 से अधिक सीटें होती थीं, वहीं आने वाले दो वर्षों में यह सिमटकर मात्र 14,000 रह जाएंगी। स्नातक और परास्नातक दोनों स्तरों पर बड़े पैमाने पर सीटें घटाई जा रही हैं। इस साल 6000 सीटें काटी गई हैं। इस फैसले से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल सहित बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड से आने वाले हजारों छात्र उच्च शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। सुविधाओं का भारी अभाव और नई लाइब्रेरी पर ताला विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। छात्रों ने बताया कि एएन झा हॉस्टल की डिस्पेंसरी में बुखार की पैरासिटामोल के अलावा कोई दवा नहीं मिलती। वहीं, 11 महीने पहले (नवंबर में) नई लाइब्रेरी का उद्घाटन होने के बावजूद उसे अभी तक छात्रों के लिए नहीं खोला गया है, जबकि पुरानी लाइब्रेरी की हालत इतनी जर्जर है कि बारिश होने पर वहां पानी भर जाता है। नियमों को ताक पर रख हुई प्रॉक्टर की नियुक्ति छात्रों ने कुलपति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए वर्तमान प्रॉक्टर की नियुक्ति को अवैध करार दिया है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस के अनुसार प्रॉक्टर पद पर केवल 'प्रोफेसर' या 'एसोसिएट प्रोफेसर' की नियुक्ति हो सकती है, लेकिन प्रशासन ने महज 4 साल के अनुभव वाले एक 'असिस्टेंट प्रोफेसर' को 11 महीने से इस पद पर बैठा रखा है। वार्ता रही विफल, छात्रों पर हो रही कार्रवाई छात्रों का कहना है कि प्रयागराज के जिला प्रशासन (एडीएम सिटी और डीसीपी) तथा विश्वविद्यालय प्रशासन (रजिस्ट्रार और डीएसडब्ल्यू) की मौजूदगी में दो बार वार्ता हुई थी। कुछ मुद्दों पर सहमति भी बनी थी, लेकिन बाद में प्रशासन अपनी बातों से मुकर गया। छात्रों का आरोप है कि उनकी आवाज दबाने के लिए उन पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें निलंबित किया जा रहा है। छात्रों ने ऐलान किया है कि जब तक उनकी सभी मांगें नहीं मानी जातीं और निलंबित छात्रों की बहाली नहीं होती, यह आर-पार की लड़ाई और आमरण अनशन जारी रहेगा।
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