कानपुर जू में एक महीने में दो बार मरीं मछलियां:HBTU पानी की जांच करेगा; टॉक्सीमार दवा, O2 मैक्स से बढ़ाया जा रहा ऑक्सीजन स्तर

Aug 21, 2026 - 00:45
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कानपुर जू में एक महीने में दो बार मरीं मछलियां:HBTU पानी की जांच करेगा; टॉक्सीमार दवा, O2 मैक्स से बढ़ाया जा रहा ऑक्सीजन स्तर
कानपुर प्राणि उद्यान (जू) की ऐतिहासिक झील में मछलियों की अचानक मौत से प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। बीते एक महीने के भीतर झील में दो बार बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की घटना सामने आ चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जू प्रशासन अब अलर्ट मोड पर आ गया है। झील के पानी में प्रदूषण और मछलियों की मौत की सही वजह जानने के लिए जू प्रशासन ने हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (HBTU) की विशेषज्ञ टीम से पानी की जांच कराने की मांग की है। HBTU को भेजा गया रिमाइंडर, 3-4 दिन में आएगी जांच रिपोर्ट जू के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले हफ्ते HBTU को पानी के सैंपल की जांच के लिए पत्र भेजा गया था, जिसके बाद बुधवार को एक रिमाइंडर लेटर भी जारी किया गया है। HBTU के विशेषज्ञों से हुई बातचीत के आधार पर अगले 3 से 4 दिनों में जांच रिपोर्ट आने की उम्मीद जताई जा रही है। जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि आसपास के नालों से झील में किस तरह का जहरीला पानी या हैवी मेटल आ रहा है, जिसकी वजह से पानी में ऑक्सीजन का स्तर अचानक गिर जाता है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए O2 मैक्स दवा और टॉक्सीमार का इस्तेमाल मछलियों के जीवन को बचाने और पानी को शुद्ध करने के लिए एहतियात के तौर पर कई जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। पानी में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के लिए 'O2 Max' दवा का छिड़काव किया जा रहा है, जबकि जहरीले तत्वों के असर को कम करने के लिए 'टॉक्सीमार' (Toximar) दवा का प्रयोग हो रहा है। नांव और लोहे के कांटों से हटाई जा रही जलीय घास झील की सफाई का काम भी युद्धस्तर पर जारी है। सफाई कार्य के लिए झील में दो नावें उतारी गई हैं। पानी के अंदर उगी अनचाही जलीय घास और कचरे को बाहर निकालने के लिए लोहे के विशेष बड़े-बड़े कांटे और पंजे बनवाए गए हैं। इन लोहे के कांटों की मदद से खींचकर घास को बाहर निकाला जा रहा है, ताकि पानी में सूरज की किरणें और हवा आसानी से पहुंच सकें और पानी स्वच्छ बना रहे। जू प्रशासन का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटना न दोहराई जाए, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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