कानपुर KESCO करा रहा GIS मैपिंग:97 में से 43 सबस्टेशनों पर काम पूरा, MD बोलीं- उपभोक्ता का पूरा डाटा एक क्लिक में मिलेगा
कानपुर शहर में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं की समस्याओं का जल्द समाधान करने के लिए केस्को (KESCO) बिजली नेटवर्क की GIS मैपिंग करा रहा है। इसके जरिए उपभोक्ता के मीटर से लेकर बिजली के पोल, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर और सबस्टेशन तक की जानकारी एक क्लिक पर मिल सकेगी। इससे बिजली विभाग को फॉल्ट की सही लोकेशन पता करने, मरम्मत करने और बिजली सप्लाई सुचारू रूप से निर्बाध रूप से जारी रखने में मदद मिलेगी। केस्को के शहर में 97 सबस्टेशनों पर GIS मैपिंग का काम किया जा रहा है। इनमें से अब तक 43 सबस्टेशनों की मैपिंग पूरी हो चुकी है। बाकी सबस्टेशनों पर भी काम जारी है। मार्च 2027 तक पूरे शहर के बिजली नेटवर्क की मैपिंग पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यवस्था में बिजली उपभोक्ताओं के मीटर अकाउंट नंबर के आधार पर उनकी यूनिक आईडी तैयार की जा रही है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी उपभोक्ता का कनेक्शन किस पोल से जुड़ा है, उसे किस ट्रांसफॉर्मर से बिजली मिल रही है और सप्लाई किस सबस्टेशन से हो रही है। इसका फायदा बिजली विभाग के साथ उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। 33 KV से लेकर घर तक के बिजली नेटवर्क की होगी मैपिंग GIS मैपिंग के तहत बिजली नेटवर्क के तीनों स्तरों को शामिल किया जा रहा है। इसमें 33 KV, 11 KV और LT नेटवर्क शामिल हैं। यानी बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़े नेटवर्क से लेकर उपभोक्ता के घर तक बिजली पहुंचाने वाले सिस्टम की जानकारी डिजिटल मैप पर उपलब्ध होगी। इसमें एक-एक डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर, बिजली के पोल और उपभोक्ता के कनेक्शन की मैपिंग की जाएगी। इससे विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस इलाके में बिजली नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है और कहां नए संसाधन लगाने की आवश्यकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी पोल या ट्रांसफॉर्मर पर लोड ज्यादा है, तो उसकी पहचान कर क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई जा सकेगी। नए बिजली कनेक्शन देने और नेटवर्क का विस्तार करने में भी यह व्यवस्था मददगार होगी। फॉल्ट की लोकेशन पता करने में नहीं लगेगा ज्यादा समय अभी बिजली सप्लाई में खराबी आने पर संबंधित लाइन, पोल या ट्रांसफॉर्मर की पहचान करने में समय लग जाता है। GIS मैपिंग पूरी होने के बाद संबंधित उपभोक्ता के कनेक्शन से जुड़ी जानकारी डिजिटल मैप पर देखी जा सकेगी। इससे कर्मचारियों को फॉल्ट तक पहुंचने और समस्या का समाधान करने में आसानी होगी। इसके अलावा बिजली विभाग की ओर से लिए जाने वाले शटडाउन का दायरा भी सीमित किया जा सकेगा। यानी मरम्मत के लिए जरूरत के मुताबिक ही संबंधित क्षेत्र की बिजली बंद करनी पड़ेगी। इससे दूसरे इलाकों के उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा। हर उपभोक्ता के पास शटडाउन और फाल्ट होने का पहुंचेगा मैसेज हर उपभक्ता के पास बिजली विभाग की तरफ से फाल्ट होने या उनके क्षेत्र में लिए जाने वाले शटडाउन की जानकारी सभी के मोबाइल मैसेज के जरिए पहुंचने की सुविधा होगी। मुंबई की तर्ज पर फाल्ट होने पर वैकल्पिक लाइन से शुरू हो सकेगी सप्लाई बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केस्को मुंबई में अपनाए जा रहे बिजली प्रबंधन के तरीकों का भी अध्ययन कर रहा है। हाल ही में मिनिस्ट्री ऑफ पावर की ओर से आयोजित एक्सपोजर विजिट में विभिन्न बिजली वितरण कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को मुंबई ले जाया गया था। वहां टाटा पावर और अदाणी पावर की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया। इस दौरान उपभोक्ता-केंद्रित बिजली व्यवस्था, सबस्टेशनों के बेहतर संचालन और बिजली बाधित होने पर वैकल्पिक व्यवस्था से सप्लाई बहाल करने जैसे पहलुओं पर जोर दिया गया। इसी तरह, GIS मैपिंग के जरिए बिजली नेटवर्क की सटीक जानकारी मिलने से केस्को को भी फॉल्ट के दौरान वैकल्पिक लाइन से सप्लाई शुरू करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए नेटवर्क की बनावट के अनुसार रिंग मेन व्यवस्था, आरएमयू (RMU) और अन्य तकनीकी इंतजाम उपयोगी होंगे। हालांकि, वैकल्पिक सप्लाई की सुविधा संबंधित क्षेत्र में उपलब्ध नेटवर्क और तकनीकी व्यवस्था पर निर्भर करेगी। लोड के हिसाब से तैयार होगा बिजली नेटवर्क GIS मैपिंग से केस्को को बिजली नेटवर्क की वैज्ञानिक तरीके से प्लानिंग करने में मदद मिलेगी। किस पोल पर कितना लोड है, किस ट्रांसफॉर्मर पर क्षमता से ज्यादा दबाव है और किस क्षेत्र में नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत है, इन जानकारियों के आधार पर काम किया जा सकेगा।
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