कानपुर में 700 परिवारों पर बेघर का संकट:बस्ती में पहुंची जेसीबी, पूर्व विधायक ने रुकवाई कार्रवाई; 15 दिन का मिला समय
कानपुर के कैंट थाना क्षेत्र के संजय नगर में गुरुवार को रेलवे की जेसीबी पहुंचते ही हड़कंप मच गया। गेट नंबर-42 के पास झुग्गी-झोपड़ियों और मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही लोग अपने घर बचाने के लिए सड़क पर उतर आए। दोपहर 1:45 बजे तक करीब 700 परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया। विरोध के बाद फिलहाल कार्रवाई रोक दी गई। मौके पर पहुंचे भाजपा के पूर्व विधायक रघुनंदन सिंह ने रेलवे अधिकारियों से बातचीत करने की बात कही। वहीं, सपा विधायक हसन रूमी ने प्रभावित परिवारों को कम से कम एक महीने का नोटिस देने की मांग की, ताकि वे रहने के लिए दूसरी जगह तलाश सकें। पूर्व विधायक बोले- आवास की व्यवस्था होने तक न हटाए जाएं घर कार्रवाई का विरोध बढ़ने पर पूर्व विधायक रघुनंदन सिंह बस्ती पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत की और रेलवे की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों के लिए आवास की व्यवस्था नहीं होती, तब तक घर हटाने की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। पूर्व विधायक ने रेलवे अधिकारियों से बातचीत कर प्रभावित परिवारों की समस्या उठाने का आश्वासन दिया। उनके पहुंचने के बाद फिलहाल कार्रवाई रुक गई। सपा विधायक ने मांगा एक महीने का नोटिस सपा विधायक हसन रूमी भी बस्ती पहुंचे। उन्होंने रेलवे प्रशासन से कम से कम एक महीने का नोटिस देने की मांग की। उनका कहना है कि अचानक घर हटाने से परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो जाएगा। नोटिस मिलने पर उन्हें वैकल्पिक आवास तलाशने का समय मिल सकेगा। महिलाएं बोलीं- नेता आश्वासन देकर चले जाते हैं कार्रवाई रुकने के बाद महिलाओं ने राहत जताई, लेकिन भविष्य की चिंता भी जाहिर की। उनका कहना है कि नेता आते हैं, आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन उनके घर और बच्चों के भविष्य का संकट बना रहता है। महिलाओं ने बताया कि उन्हें दिवाली तक बस्ती में रहने की बात कही गई थी। ऐसे में अचानक घर तोड़ने की कार्रवाई शुरू होने से उनके सामने सवाल है कि वे अब कहां जाएंगे। घर टूटे तो बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा असर बस्ती के रमेश, आदिल और मनीष ने बताया कि घर हटाए जाने से परिवारों को परेशानी होगी। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है। प्रभावित परिवारों की मांग है कि पहले उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, उसके बाद ही कोई कार्रवाई हो। फिलहाल संजय नगर के करीब 700 परिवार रेलवे और प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। कार्रवाई रुकने के बावजूद लोगों को अपने आशियाने उजड़ने की चिंता सता रही है।
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